बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बन रहा न का उसका बाईपास। संवाद
सिद्धार्थनगर। नदियों और प्राकृतिक नालों के किनारे बाढ़ क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। डीएम ने सभी विभागों से गंगा गजट के दायरे में आने वाली परियोजनाओं का ब्योरा मांगा है। साथ ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना भुगतान न करने के निर्देश दिए हैं।
जिला गंगा समिति की ओर से जारी पत्र के बाद जिलाधिकारी ने सभी विभागों को गंगा गजट 2016 के पैराग्राफ छह और 42 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा है। इसके तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों के तट, तल तथा सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में संचालित और प्रस्तावित निर्माण परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। साथ ही संबंधित परियोजनाओं के लिए एनएमसीजी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।
गंगा गजट 2016 के प्रावधानों के तहत नदी के तट और सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या अन्य प्रयोजन के लिए निर्माण पर निर्धारित प्रतिबंध लागू हैं। पुल, संपर्क मार्ग और घाट जैसी परियोजनाओं के लिए भी संबंधित नियमों और अनुमति का पालन जरूरी है। प्रशासन अब विभागों से मिलने वाले ब्योरे के आधार पर इन प्रावधानों के अनुपालन की स्थिति देखेगा। जमुआर से बूढ़ी राप्ती तक हो रहे निर्माण : शहर के बीच से गुजरने वाले प्राकृतिक जमुआर नाले के आसपास भी निर्माण कार्य हो रहे हैं। भीमापार, पुरानी नौगढ़ पुल और पिठनी पुल के पास निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में प्लाॅटिंग के साथ भवन बनाए जा रहे हैं।
इसके अलावा बांसी और डुमरियागंज क्षेत्र में राप्ती नदी के किनारे और उसका बाजार क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी के आसपास भी निर्माण हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं का ब्योरा जुटाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नदी किनारे बन रहा एनएच का बाईपास : उसका बाजार क्षेत्र में एनएच-730 के निर्माण के तहत बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बाईपास बनाया जा रहा है। वहीं, कूड़ा नदी पर नए पुल का निर्माण भी कराया जा रहा है।
जिला गंगा समिति की ओर से एनएच के अधिशासी अभियंता, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों और जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र भेजा गया है।