मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेते डॉ. गौरव दुबे। संवाद
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सिद्धार्थनगर। ठंड का मौसम शुरू होते ही सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य दिखने वाली यह समस्या कई बार गंभीर रूप ले लेती है और समय पर ध्यान न देने पर पूर्व से दमा और सांस से पीड़ित मरीज के फेफड़ों तक संक्रमण पहुंच सकता है। इससे मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन रोग विभाग में वर्तमान समय में 100 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसमें से 25 से 30 मरीज दमा व सांस से संबंधित आ रहे हैं। दमा व सांस के मरीज को सर्दी व जुकाम होने पर परेशानी और भी बढ़ जा रही है। इससे उन्हें फेफड़े के संक्रमण से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि तापमान में गिरावट के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। ठंडी हवा के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र कमजोर हो जाता है और वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यदि रोगी पहले से अस्थमा, एलर्जी, शुगर या हृदय रोग से पीड़ित है, तो उसके फेफड़ों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यदि सर्दी-जुकाम एक सप्ताह से अधिक बना रहे, खांसी में बलगम आए, तेज बुखार हो, सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।