_छगडिहवा घाट की वर्तमान तस्वीर सरकारी दावों को मुंह चिढ़ा रही है। आज भी लोग अपनी मोटरसाइकिलें औ
बिस्कोहर। बूढ़ी राप्ती नदी के छगडिहवा घाट पर पक्के पुल का निर्माण छह साल से सरकारी फाइलों और पत्राचार में अटका हुआ है। इटवा विधानसभा क्षेत्र के इस घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण स्थानीय विधायक से लेकर शासन तक कई बार गुहार लगा चुके हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पुल निर्माण के लिए व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है लेकिन उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग स्तर से अंतिम वित्तीय स्वीकृति यानी शासनादेश जारी होना बाकी है। शासनादेश नहीं आने के कारण टेंडर प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पुल नहीं होने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को रोजाना नाव से नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने से जोखिम और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के तेज बहाव के बीच छोटी नावों से आवागमन करना किसी खतरे से कम नहीं है। इसके बावजूद लोगों को मजबूरी में इस पार से उस पार जाना पड़ता है।
25 से 30 किलोमीटर का लगाना पड़ता है अतिरिक्त चक्कर : पुल नहीं होने से इटवा विधानसभा क्षेत्र के साथ ही बलरामपुर जिले के गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र की बड़ी आबादी भी प्रभावित है। पिपराहवा, जमुनी, मोहम्मदपुर और सेमरा समेत कई गांवों के लोगों को नदी के दूसरी ओर जाने के लिए करीब 25 से 30 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। नदी के दोनों ओर कई शिक्षण संस्थान हैं। ऐसे में