कपिलवस्तु। नेपाल के काभ्रेपलांचोक जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से के प्रमुख ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को ‘बुद्ध सर्किट’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए नेपाल सरकार ने 25 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया है। सर्किट के तहत पनौती, नमोबुद्धा और तेमल जैसे ऐतिहासिक क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। काभ्रेपलांचोक के सांसद मधु चौलागाईं के अनुसार पहले चरण में पनौती के दाबिली से नमोबुद्धा तक करीब आठ किलोमीटर लंबे मार्ग को विकसित किया जाएगा। इसके लिए सड़क के दोनों ओर बुद्ध से जुड़ी भौतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का निर्माण, जगह-जगह माने, चैत्य और लाफिंग बुद्ध की प्रतिमाएं लगाने और थंका सहित जानकारी देने वाले बोर्ड लगाने पर 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस मार्ग को विकसित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा चुका है।
बुद्ध सर्किट के तहत नमोबुद्धा-भकुंडेबेसी मार्ग पर दपचा के बोक्से सामुदायिक वन क्षेत्र में हिरण पार्क बनाने की योजना है। सांसद के अनुसार इसके लिए स्थान का चयन कर लिया गया है और बागमती प्रदेश के वन मंत्रालय में योजना की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। भकुंडेबेसी के चारदोबाटो में बीपी राजमार्ग के किनारे ‘सांस्कृतिक संगम द्वार’ बनाने की भी योजना है। इसमें विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के प्रतीक और संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। नमोबुद्धा से भकुंडेबेसी होते हुए तेमल तक करीब 25 किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर भी बौद्ध विरासत से जुड़े निर्माण किए जाएंगे। यहां माने, चैत्य, लाफिंग बुद्ध की प्रतिमाएं और थंका सहित जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए जाएंगे। तेमल के यांगबेल में बुद्ध पार्क बनाने की योजना भी प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। पार्क में गुरु रिनपोछे की बड़ी प्रतिमा के साथ बुद्ध की विभिन्न प्रतिमाएं, घंटाघर, शांति चैत्य, थंका लेखन विद्यालय और पार्किंग की सुविधा विकसित करने की योजना है।
सांसद के अनुसार थंका विद्यालय बनने से स्थानीय युवाओं को इसी क्षेत्र में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इससे तेमल की कला, इतिहास और संस्कृति को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इतिहासकारों के अनुसार पनौती का त्रिवेणीघाट भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां पुण्यमाता और रोशी नदियों के साथ पद्मावती नदी के गुप्त रूप से प्रवाहित होने की मान्यता है। वहीं नमोबुद्धा को बौद्ध धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां महायान मठ, बुद्ध की प्रतिमाएं और चैत्य मौजूद हैं। तेमल को तमांग समुदाय के इतिहास और संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। यहां गुरु पद्मसंभव से जुड़ी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। बुद्ध सर्किट के विकास से इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को एक पर्यटन मार्ग के रूप में जोड़ने की योजना है।