फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: सवा करोड़ से संवारा जाएगा भिरंडा माता मंदिर

Thu, 04 Dec 2025 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
शोहरतगंढ़ में ​स्थित भिरंडा माता मंदिर। संवाद - फोटो : संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अ​धिवक्ता परिषद के पदा​​धिकारी व अन्य।
विज्ञापन
-शासन से आवंटित हुआ बज,ट जल्द होगा मंदिर का कायाकल्प
विज्ञापन

- बैठने की व्यवस्था के साथ बेहतर रोशनी और अन्य सुविधाओं से होगा लैस

सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ नगर पंचायत में स्थित भिरंडा समय माता स्थल की सूरत जल्द बदली-बदली नजर आएगी। सवा करोड़ रुपये से इसका सुंदरीकरण किया जाएगा। यहां पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भवन सहित मांगलिक कार्यक्रम शादी-विवाह, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, इंगेजमेंट सहित आदि कार्यक्रम करने में क्षेत्र के लोगों सुविधा मिलेगी। विधायक विनय वर्मा ने प्रस्ताव पर पर्यटन विभाग ने बजट जारी कर दिया है।
कस्बे के शोहरतगढ़ से खुनुवां बाईपास पर दो किमी उत्तर दिशा में जाने के बाद मां के दरबार में प्रवेश करने के लिए पूरब दिशा में गेट लगा है। प्रवेश करने के बाद एक किलोमीटर चल कर मां भिरंडा देवी के मंदिर पर आसानी से पहुंच सकते हैं। मंदिर पर आस्थावानों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विधायक विनय वर्मा ने मंदिर के सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखकर शोहरतगढ़ में स्थित भिरिंडा समय माता स्थल का पर्यटन विकास के लिए प्रस्ताव मांगा था, जिसकी स्वीकृति मिल गई है। अब भिरिंडा समय माता स्थल के विकास व सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग की ओर से 116.22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
विज्ञापन

मंदिर के पुजारी विलियम शर्मा ने बताया मंदिर का सुंदरीकरण होने श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। यहां अतिरिक्त भवन का निर्माण के साथ-साथ अन्य विकास के कार्य होने हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भवन सहित मांगलिक कार्यक्रम शादी, विवाह, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, इंगेजमेंट सहित आदि कार्यक्रम करने में क्षेत्र के लोगों सुविधा मिलेगी।
विज्ञापन

-
मान्या है कि पूरी होती हैं मुरादें
यहां 40 वर्ष पूर्व में विशालकाय पीपल के पेड़ के नीचे दो पिंड थी। पिंड पर तेल व सिंदूर चढ़ा कर क्षेत्र के किसान फसल अच्छी होने के लिए प्रार्थना करते थे। फसल की पैदावार अच्छा होने पर हलवा पूरी का कड़ाही चढ़ाते थे। एक दिन एक सरदार रविंद्र सिंह अपने गरीबी से तंग होकर इस सुनसान झाड़ के पास पिंडी पर आकर रोते हुए मां से अपनी गरीबी दूर होने की विनती की। नवरात्र में सफाई करवा कर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू की। नवरात्र खत्म होते ही सरदार को एक लाख की लाॅटरी लगी। इस रुपये से वह संपन्न होने लगे। इसकी चर्चा क्षेत्र में फैल गई। लोगों में आस्था बढ़ने लगी, फिर बाद में भव्य मंदिर बनवाया गया। मान्यता है कि मंदिर पर जो भी कुछ मांगता है उसकी मुरादें मां पूरी करती हैं। मंदिर की व्यवस्था दस सदस्यीय कमेटी की देख-रेख में होती हैं। यहां क्षेत्र के लोग मुंडन संस्कार और एंगेजमेंट आदि कराने आते हैं। आस्था से दरबार में आए सभी लोगों की झोलियां मां खुशियों से भर देती हैं। नवरात्र में यहां जगराता एवं विशाल मेला लगता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें