सिद्धार्थनगर। जनपद में बिक रहे हल्दी, मिर्च, धनिया और अन्य पिसे मसालों में केमिकल, अमानक सामग्री और मिस ब्रांडिंग की पुष्टि हुई है। लग्न और शादी-विवाह के सीजन में बढ़ी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोरों ने मसाला बाजार में कब्जा जमा लिया है।
जांच में पाया गया कि उपभोक्ताओं की सेहत से सीधा खिलवाड़ करते हुए मसालों में रासायनिक रंग, पपीते के बीज, चावल पाउडर और अन्य सस्ती सामग्री मिलाकर उन्हें पैकेट में बंद कर बाजार में खपाया जा रहा है।
यह पूरा खेल सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं बल्कि इसके तार मंडियों और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। जहां यह जेब पर वार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेहत से खिलावड़ भी हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जितनी मिलावट होगी, सेहत को उतना ही नुकसान होगा। ऐसे में वह सतर्क होकर खरीदने और सही वस्तु का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं।
लग्न का सीजन शुरू हो गया है। धंधेबाज भी पहले से ही बाजार में बिसात बिछाकर बैठे हुए हैं। मिलावट करने वाले ताक में हैं कि कब डिमांड बढ़े और मिलावटी खेप बाजार में उतारकर करके माेटी कमाई की जा सके। ऐसे अवसरों में लग्न और त्योहार दो महत्वपूर्ण है, जहां इनकी दाल गल जाती है और खरीदने वाले को पता तक नहीं रहता है कि गुणवत्ता कैसी है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच रिपोर्ट में मसाला तीन सैंपल में मिलावट की बात सामने आई है। ऐसे में आपको सतर्क रहने की जरूरत है कि इस मिलावट से कैसे बचाव किया जा सके।
लग्न के सीजन पर पांच करोड़ का कारोबार: शहर में थोक और कस्बों में किराने के दुकानदारों से जब मसाले के कारोबार और अनुमानित बिक्री के बारे में जानकारी ली तो उनका कहना था मसाले का कारोबार साल भर चलता है। सिर्फ लग्न में कई करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
एक छोटे परिवार में शादी और मांगलिक कार्यक्रम में 10-20 हजार रुपये का मसाला बिक जाता है। मिडिल और अपर मिडिल क्लास में 50 से 80 और बड़ी शादियों में आइटम के हिसाब से भंडारी लिखते हैं जो एक लाख रुपये तक चल जाता है। चार माह में हजारों शादियां हाेंगी। ऐसे में औसत कई करोड़ के कारोबार का होने का अनुमान है। इसी बड़े कारोबार को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कई मसाले ऐसे दाम पर बेचे जा रहे हैं, जो शुद्ध कच्चे माल की लागत से भी कम हैं। यही सस्ते दाम मिलावट का सबसे बड़ा संकेत हैं, लेकिन महंगाई के दौर में आम उपभोक्ता
कीमत देखकर खरीदारी कर लेता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर मिलावटखोर पैकेट में खेल कर रहे हैं, नाम ब्रांड का लेकिन अंदर माल पूरी तरह मिलावटी मिल रहा है।
गोरखपुर, कानपुर से सप्लाई, यहां पर मिलावट: बाजार के थोक दुकानदारों के मुताबिक जनपद में आने वाले करीब 60 प्रतिशत मसाले गोरखपुर मंडी से आते हैं जबकि शेष सप्लाई कानपुर और अन्य बड़े बाजारों से होती है।
इन मंडियों से कच्चा माल आने के बाद स्थानीय स्तर पर मिलावट कर पैकेट तैयार किए जाते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में नामी कंपनियों जैसे दिखने वाले पैकेट तैयार कर मिस ब्रांडिंग के जरिये नकली माल खपाया जा रहा है। पहले भी जनपद में मिस ब्रांड मसालों के मामले पकड़े जा चुके हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि कई स्तर पर मिलावट की जाती है।