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Siddharthnagar News: श्रीराम का जन्म होते ही पंडाल में गूंजे मंगल गीत

Sun, 19 Oct 2025 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के सहिजवार में रामलीला में झांकी का मंचन करते कलाकार। संवाद
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भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के सहिजवार में नौ दिवसीय श्रीराम लीला समारोह का शुभारंभ हुआ। पहले दिन शनिवार की रात स्थानीय कलाकारों ने जहां नारद मोह का सजीव मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, श्रीराम जन्म की लीला का मंचन होते ही पूरा पंडाल सोहर व मंगल गीतों से राम मय हो गया।
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नव युवक श्रीरामलीला समारोह समिति सहिजवार के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का प्रथम दर्शन में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती होती है। इसके बाद नारद मोह की लीला प्रारंभ हो जाती है। नारदजी एक उत्तम स्थान पर बैठकर भगवान हरि की तपस्या करने लगते हैं, जिस कारण भगवान इंद्र का सिंहासन हिलने लगता है। इंद्र को मालूम पड़ता है कि नारद जी की तपस्या से उनका सिंहासन हिल रहा है। उनकी तपस्या भंग करने के लिए इंद्र देव अप्सराओं को भेजते हैं। रंभा, उर्वशी आदि अप्सराएं भी नारद जी की तपस्या भंग नहीं कर पाती उसके बाद भगवान इंद्र कामदेव को भेजते हैं। कामदेव भी तपस्या को भंग नहीं कर पाते है। तभी नारद अपनी तपस्या को स्वयं विराम देते हैं और कामदेव को माफ कर देते हैं। इस कारण भगवान नारद को अभिमान आ जाता है कि मैंने काम-क्रोध जीत लिया। जबकि, भगवान शंकर भी क्रोध पर विजय नहीं कर पाए थे। भगवान अपने भक्तों में कभी भी अभिमानी होना नहीं देखते।
भगवान विष्णु के प्रकट होने पर नारद ने उनसे हरि रूप मांगा तो उन्होंने नारद के अभिमान को खत्म करने हेतु नारद जी को हरि रूप की जगह बंदर का रूप प्रदान किया। वही रूप लेकर वह एक स्वयंवर में गए, जहां उनका लोगों ने खूब मजाक उड़ाया तब उनको पता चला कि उनका रूप तो बंदर का है।
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