बभनी गांव में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सुनाया गया भगवान के जन्म का प्रसंग
‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर मनाया जन्मोत्सव
चिल्हिया। क्षेत्र के बभनी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कथावाचक पंडित अजय कुमार तिवारी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया। भगवान के जन्म का प्रसंग आते ही कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ का उद्घोष करते हुए नृत्य किया और धूमधाम से जन्मोत्सव मनाया।
कथावाचक ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही सभी ताले खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। देवकी और वासुदेव की हथकड़ियां और बेड़ियां भी खुल गईं। इसके बाद वासुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर नंद बाबा के घर जाने लगे। रास्ते में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर उन्होंने बालक कृष्ण को दोनों हाथों से ऊपर उठा लिया। इसके बाद यमुना ने उन्हें सुरक्षित रास्ता दिया और वे नदी पार कर गए।
उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान का स्मरण करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान राम दयाल चौहान, मोलयई चौहान, हरिराम चौहान, पं. रित्तिक तिवारी, पं. अंकुश तिवारी, रामसरन यादव, बाल निवास शर्मा, आमिर, डॉ. राम कैलास यादव, मोतीलाल वर्मा और पिंकू वर्मा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।