- जिले में बंद पड़ी हैं 14 सहकारी समितियां, जिस न्याय पंचायत के किसान वहीं की समिति पर खाद लेने की व्यवस्था ने बढ़ाई मुसीबत
सिद्धार्थनगर। खाद की कालाबाजारी पर लगाम के लिए बनाई गई नई व्यवस्था ने कुछ इलाकों में किसानों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। दरअसल, धंधेबाजों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन ने तय किया कि किसानों को उनकी न्याय पंचायत की सहकारी समिति से ही खाद दी जाए। धान खरीद घोटाले की जांच या भवन जर्जर होने की वजह से जिले की 124 में 14 समितियां बंद पड़ी हैं। इन समितियों से जुड़े क्षेत्रों के किसानों को दूसरी न्याय पंचायत में खाद नहीं मिल रही और वे भटकने को मजबूर हो गए हैं।
तुलसियापुर संवाद के मुताबिक बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र में जो समितियां बंद हैं, उन पर खाद न आने के कारण उससे जुड़े किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। अगर उस न्याय पंचायत के किसान दूसरी समितियों पर खाद लेने जा भी रहे हैं तो उन्हें लौटा दिया जा रहा है। किसानों ने डीएम से बंद समितियों पर भी खाद दिलवाने की मांग की है। क्षेत्र के रेड़वरिया न्याय पंचायत के औदही कला में साधन सहकारी समिति का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। रेड़वरिया न्याय पंचायत में औदही कला, रेड़वरिया, खरिकौरा, घोरही उर्फ रौनिहवा, सेमरहवा, भावपुर उर्फ गुलरी, मानपुर, जिगनिहवा उर्फ धनौरी, बरगदवा कुल नौ ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों के किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल तो दो-तीन बार खरिकौरा में यूरिया बांटा गया था, लेकिन इस बार यूरिया का आवंटन नहीं हुआ है। जब इन गांवों के किसान किसी दूसरी समिति पर खाद लेने जाते हैं तो उन्हें लौटा दिया जाता है।
रेड़वरिया न्याय पंचायत के मो.फैजान, हेमंत शुक्ल, महबूब, राम निरंजन, रामदेव गुप्ता, सलाउद्दीन, मो. सलाम आदि ने बताया कि सोमवार को परसा स्टेशन स्थित समिति पर यूरिया बंट रहा था। हम लोग लाइन में लगे थे, टोकन भी मिला था, लेकिन जब नंबर आया तो यह कहकर लौटा दिया गया कि यह केवल परसा न्याय पंचायत की खाद है। इस तरह 50 की संख्या में महिला व पुरुष किसानों को लाइन से निकाल दिया गया। अब किसानों का कहना है कि प्रशासन बताए कि रेड़वरिया न्याय पंचायत के नौ गांवों के किसान यूरिया पाने के लिए क्या करें। किसानों ने कहा कि उन्हें यूरिया केवल भारत-नेपाल सीमा के नजदीक रहने के कारण नहीं मिल रहा है।
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बोले जिम्मेदार
जिलाधिकारी की ओर से एसडीएम को खाद आवंटन की जिम्मेदारी दी गई है। जहां एसडीएम संस्तुति करते हैं, वहीं खाद जा रही है।
- चंद्रजीत यादव, एडीसीओ, काेऑपरेटिव
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बोले किसान
सोमवार को हम 50 किसान यूरिया लेने के लिए परसा गए थे, टोकन भी मिला था। लेकिन बाद में दूसरे न्याय पंचायत का बताकर हम लोगों को निकाल दिया गया। हम खाद कहां से लाएं।
- महबूब, किसान
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अभी तक औदही कलां में एक बार भी यूरिया नहीं आया है। यहां के किसानों को दूसरी न्याय पंचायत में यूरिया नहीं दिया जा रहा है। यहां के किसानों को भी खाद की व्यवस्था की जाए।
- अब्दुल सलाम, किसान