सिद्धार्थनगर/भनवापुर। राजस्थान के झालवाड़ा में हुई घटना में विद्यालय में पढ़ने वाले कई मासूम असमय काल के गाल में समा गए। इस घटना के बाद देश भर में सरकारी भवनों के मानक और उनकी मरम्मत पर सवाल उठ गए।
मासूमों की जान न जाए, इसके लिए सरकार ने पूरे देश के सरकारी विद्यालयों सुरक्षा से संबंधित ऑडिट के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे समय रहते खामियों को दूर किया जा सके। प्रशासन की ऑडिट से पहले संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने विद्यालयों की हकीकत जानने की कोशिश की तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं।
कहीं छत की बीम दरक चुकी है तो कहीं सरिया नजर आने लगा है। कहीं प्लास्टर टूट कर गिरता रहा है तो कहीं कच्चे फर्श पर ही बच्चे पढ़ाई को मजबूर हैं।
खतरे की चुनौतियों के बीच मौत के साए में भविष्य गढ़ रहे हैं। हालांकि, जिम्मेदार सबकुछ अच्छा होने और किसी भी जर्जर विद्यालय में बच्चाें के ना पढ़ाए जाने का दावा कर रहे हैं।
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को पड़ताल में कहीं महीनों से विद्यालय का ताला नहीं खुला तो कहीं टपकती छत व लटकी बीम के नीचे जान जोखिम में डालकर बच्चे पढ़ते मिले। इतना ही नहीं कुछ विद्यालयों के परिसर में कीचड़ और गंदगी के बीच लगे हैंडपंप का पानी पीने को बच्चे मजबूर दिखे।
11:45 कम्पोजिट विद्यालय डिवलीडीहा चौबे यहां इंचार्ज प्रधानाध्यापक अशोक कुमार व शिक्षामित्र बब्बू लाल मौजूद रहे। वहीं, दूसरे शिक्षामित्र मलिक हबीब स्कूल में नहीं थे।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय के जर्जर भवन के कारण प्राथमिक विद्यालय के भवन में बच्चों को पढ़ाने का कार्य अध्यापकों की ओर से किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय का भी भवन जर्जर हालत में है, जिसकी दीवारें दरक गई हैं। छत के प्लास्टर टूट कर गिरने के कारण बच्चे हमेशा दहशत में रहते हैं। यहां पंजीकृत 107 बच्चों के जगह 35 बच्चे मौजूद मिले, जिन्हें कभी भी दूध व फल का वितरण नहीं किया जाता है।
एक जुलाई से नहीं खुला ताला: 11:55 बजे पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरिया चमन यहां विद्यालय में ताला लटका मिला।
बगल में पेड़ के नीचे बैठे सफाई कर्मचारी अरविंद कुमार व रमेश चंद्र ने बताया कि मैं तो विद्यालय परिसर का साफ सफाई करने आता हूं, मगर एक जुलाई से आज तक इस विद्यालय का ताला खुला नहीं देखा।