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Siddharthnagar News: जानवरों ने 77 हजार लोगों को बनाया शिकार

Fri, 09 Jan 2026 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। ठंड, भूख और सड़क हादसों में लगातार हो रही कुत्तों के बच्चों की मौतों से कुत्ते आक्रामक हो गए हैं। कुत्तों की बढ़ती आबादी और हमले से चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कब, कहां और कैसे, इनके हमले का शिकार बन जाएं इसकी कोई गारंटी नहीं है। इनका शिकार हो रहे बुजुर्ग, मासूमों की चीख जिम्मेदारों के कानों तक नहीं पहुंच रही हैं।
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आंकड़ों पर गौर करें तो एक साल में 77 हजार लोग कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के शिकार हुए हैं। इनमें अकेले 58 हजार मामले कुत्तों के काटने के हैं। मगर सबकुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तो हुई है, लेकिन अंजाम तक पहुंचेगी या नहीं, इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
कुत्ताें के हमले की जो आंकड़ें सामने आए हैं, वह दर्द देने और सोचने को मजबूर करने वाले हैं। पूर्व में हुए कोर्ट के आदेश और मौजूदा हालात क्या हैं, इसकी हकीकत जानने की कोशिश की गई तो नतीजे चौंकाने वाले रहे। शहर की सड़कें, रेलवे स्टेशन, मेडिकल कॉलेज और कलक्ट्रेट, जहां कभी सुरक्षा का एहसास होता था, आज वहीं खतरा मंडरा रहा है। इंसान के प्रति कुत्तों और बिल्लियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
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आंकड़े बताते हैं कि हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। 2022 में जहां कुत्ता, बिल्ली, बंदर और अन्य पशुओं के हमले के 15 हजार मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 77 हजार पहुंच चुकी है। यह आकड़ें उन लोगों के हैं जो अस्पताल तक पहुंचे और उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया गया। वहीं, बड़ी आबादी ऐसी भी है, जिन्होंने अपने साधन का इस्तेमाल किया या अस्पताल ही नहीं पहुंचे। पशु विशेषज्ञ काटने के पीछे कई वजह बता रहे हैं और सतर्कता बरतने के साथ ही पालतु जानवरों को समय- समय पर एंटी रैबिज लगवाने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में पकड़े गए थे 700 घुमंतू कुत्ते: सिर्फ कुत्ते और बिल्ली ही नहीं बंदर और अन्य आवारा जानवरों के हमले भी तेजी से बढ़े हैं। 2024 में कुत्तों के हमलों में पांच लोगों की जान चली गई। तीन महीने पहले कोर्ट के आदेश पर पूरे जनपद की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अभियान चला। इसमें करीब 700 कुत्ते पकड़े गए, लेकिन उन्हें आसपास के जंगलों में छोड़ दिया गया, जहां से वापसी की चिंता अब हकीकत बनती दिख रही है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सड़क और हाईवे से आवारा कुत्तों को हटाने की बात तो कही गई, मगर जिले में ठोस व्यवस्था न होने से आदेश कागजाें तक सिमटा रह गया। इसका नतीजा है कि शहर में रेलवे स्टेशन और मेडिकल कॉलेज में अंदर गैलरी में कुत्ते देखने को मिल जा रहे हैं।
वहीं, विकास भवन और कलक्ट्रेट में शुक्रवार को कुत्ते तो नजर नहीं आए लेकिन, वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि अकसर आ जाते हैं और डेरा जमा लेते हैं।
ठंड के कारण फर्श पर गलन है, इसलिए कम आ रहे हैं। गर्मी में तो इनका डेरा रहता है। क्योंकि, गर्मी से बचने के लिए कोने और सीढ़ी के पास शरण लेते हैं। अगर कोई दखल दी जाए तो नोच भी लेते हैं। 21वीं पशु गणना अनुसार जिले में कुत्तों की संख्या 19,700 थी। चार साल में यह संख्या बढ़कर 25 हजार से अधिक हो गई होगी। जानकारों का मानना है कि आबादी बढ़ने के साथ इंसान-जानवर टकराव खतरनाक मोड़ पर है। अभियान नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत है। वरना हर सुबह सड़क पर उतरते ही सवाल यही होगा कि अगला शिकार कौन है।
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