सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु व माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मध्य चिकित्सा सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया। इससे आगामी समय की कार्य योजना में प्रस्तावित बीएससी नर्सिंग के पाठ्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए यह करार हुआ है। इससे दोनों संस्थान चिकित्सा और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करेंगे।
नर्सिंग पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सालय से संबद्धता आवश्यक होती है, इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए यह समझौता किया गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय व मेडिकल कॉलेज दोनों संस्थानों की भूमिका इस क्षेत्र के लोगों, विशेषकर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों संस्थान मिलकर शिक्षा और चिकित्सा के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर क्षेत्र में प्रगति कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को नर्सिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के लिए सुदूर जाना पड़ता है, भविष्य में यदि यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय में प्रारंभ हो जाता है तो स्थानीय विद्यार्थियों को लाभ इसका बहुत लाभ भी होगा और मानव सेवा का पुनीत कार्य भी सम्भव है।
नर्सिंग शिक्षा न केवल रोजगार की दृष्टि से बल्कि मानव सेवा की भावना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा कि विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज की भूमिका केवल पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के व्यापक हित में कार्य करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान दिया जा सकता है।
दोनों संस्थान मिलकर रक्तदान, देहदान और अंगदान जैसे पवित्र कार्यों के प्रति समाज, विशेषकर युवाओं को जागरूक कर सकते हैं, जिससे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास संभव होंगे।
प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन ने कहा कि मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी हेल्थ के क्षेत्र में अपने पाठ्यक्रमों से आगे बढ़कर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर क्षेत्रीय विकास में मेडिकल कॉलेज अपना उल्लेखनीय योगदान दे सकेगा। उन्होंने बताया कि टेली क्लीनिक के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सक विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर चिकित्सीय परामर्श एवं सहयोग उपलब्ध कराएंगे, जिसके लिए आगे विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस दौरान कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, वित्त अधिकारी रामेंद्र मौर्य, आईसीसी निदेशक प्रो. सौरभ, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. अविनाश प्रताप सिंह, प्रो. विष्णु अवस्थी आदि मौजूद रहे।