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Siddharthnagar News: फलाहार में मिलावट...सेहत के साथ व्रत भी खतरे में

Sun, 21 Sep 2025 11:07 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के दुकान में सजा हुआ खाद्य सामग्री। संवाद
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सिद्धार्थनगर। होली, दीपावली की तरह नवरात्रि में भी धंधेबाजाें ने जाल बिछा दिया है। मुनाफा खोरी के लिए धंधेबाज बाजार में बड़ी मात्रा में मिलावटी सामान उतार चुके हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से की गई जांच और सैंपलिंग में घी, तिल, मुंगफली के तेल, कुट्टू के आटे में मिलावट और मिस ब्रांड की पुष्टि हो चुकी है। साथ ही मिलावट पाए जाने के बाद केस दर्ज कराने के साथ ही कोर्ट ने ऐसे धंधेबाजों पर जुर्माना भी लगाया है।
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मिलावटी खाद्य सामग्री बेचकर करोड़ों का मुनाफा कमाने वाले धंधेबाज न सिर्फ आपकी सेहत बिगाड़ देंगे बल्कि इससे आपका व्रत टूट जाएगा। ऐसे में इनको इस्तेमाल करने से पहले परखकर खरीदारी करना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने दिवाली और होली पर सैंपलिंग की थी। इसमें घी और तिल के तेल में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, चैत्र नवरात्रि में कुट्टू के आटे में मिलावट की बात सामने आई थी। ऐसे में अब बाजार में उपलब्ध सामग्री किस हद तक सही है, इसका अंदाजा लगना मुश्किल है। मिलावट के धंधेबाज मोटी रकम कमाने के चक्कर में ऐसा कर रहे हैं।
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बाजार की पड़ताल की गई तो कई ऐसे खाद्य सामग्री बाजार में व्रत वाला कहकर बेचा जा रहा है, जिसके बारे में पता ही नहीं है कि किस तेल में बनाया गया है।
दुकानदार जिन खाद्य सामग्रियों को शुद्ध व्रत वाला कहकर बेच रहे हैं, वह भी कितनी शुद्ध है, इसकी उन्हें भी जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि व्रत में लोग घी और अन्य खाद्य तेल में तलकर खाते हैं।
अगर आपको पहले से किसी प्रकार की परेशानी है तो मिलावटी तेल आपको बीमार बना सकता है। ऐसे में सोच-समझकर ही तली-भुनी चीजों का इस्तेमाल करें। खासतौर पर बाजार में उपलब्ध रेडीमेड सामानों से जहां तक मुमकिन हो परहेज करें।
वहीं, तेल की बात करें तो मूंगफली का तेल साफ मानकर उसे खाया जाता है, मंदिर में दीप जलाए जाते हैं, लेकिन रेट का अंतर बताता है कि इसमें गड़बड़ी है। एक 230 रुपये लीटर है तो दूसरा 170 रुपये और 160 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। खड़ा दाना 140-170 रुपये किलो बेचा जा रहा है।
ऐसे में आप गुणवत्ता के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। कैसे 150-160 रुपये में मूंगफली का तेल पा सकते हैं। वहीं, तिल के तेल की 150 से 220 रुपये प्रति लीटर है, जबकि, खड़े तिल की कीमत 150-200 रुपये किलो है। ऐसे में असली और शुद्ध होने का अंदाजा लगा सकते हैं।
एक नजर विभाग की कार्रवाई पर: अप्रैल से अब 200 नमूना संग्रहीत किया। इसमें कई सामग्री मिस ब्रांड, तेल और घी में मिलावट की पुष्टि होने पर अब तक जैसे-जैसे रिपोर्ट आई है। 11,61,000 जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं, मिलावट की आशंका में 20,134 लीटर खाद्य तेज सीज, खाने वाला खारी 250 क्विंटल, फूड ड्रिंक 1571 लीटर सीज किया गया है। इसमें कुछ रिपोर्ट आना बाकी है।
इसमें बड़ा खेल, सबसे अधिक मिलावट: व्रत में लोग फलाहार पर लोग निर्भर रहते हैं। लोग नौ दिन का व्रत रह रहे हैं। इससें कुट्टू का आटा और सिंघाड़े की मांग अधिक रहती है। बाजार की बात करें तो सिंघाड़ा और कुट्टू का आटा 140-160 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
इसकी आड़ में मिलावटखोर अरारोट और पिसा चावल मिला आटा ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। देशी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई छोटी-छोटी कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देशी घी बाजार में उपलब्ध है। इन गुमनाम कंपनियों की पैकिंग में देशी घी वाली खुशबू भी नहीं रहती। जबरदस्त गर्मी के बावजूद यह देशी घी जमा रहता है जबकि शुद्ध देशी घी गर्मी में अपने आप पिघल जाता है।
खाद्य विभाग के अधिकारियाें के अनुसार नकली साबूदाना बनाने में सोडियम हाइपोक्लोराइट, कैल्शियम सल्फ्यूरिक एसिड, हाइपोक्लोराइट, ब्लीचिंग एजेंट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।
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