मेडिकल कॉलेज के परिसर में स्थित नशा मुक्ति केंद्र। संवाद
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नशा मुक्ति केंद्र पर जल्द ही ओएसटी (ओपिएड सब्सियल्ट्यूशनल थेरेपी) सेंटर की स्थापना की जाएगी। इंजेक्शन से नशा कर रगों में जहर घोल रहे लोगों को इस लत से आजादी दिलाने के लिए थेरेपी सेंटर का संचालन किया जाएगा। जिले में वर्तमान में 200 मरीज का नियमित इलाज किया जा रहा है।
मानसिक रोग विशेषज्ञ विभागाध्यक्ष डॉ. मो. अफजल के मुताबिक नशाग्रस्त मरीजों के परिजनों को इनके इलाज के लिए वाराणसी, लखनऊ सहित प्रदेश के बड़े शहरों में जाकर उपचार कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही परिवार के ऐसे सदस्य जो गलत संगत में नशे की लत से अपनी सेहत बिगाड़ चुके हैं, उनका समुचित उपचार किया जाएगा।
युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी। इसी कड़ी में नशा की लत छुड़ाने के लिए विशेषज्ञों के साथ स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस सेंटर पर न सिर्फ नशाग्रस्त मरीजों का जांच होगा बल्कि दवा भी दी जाएगी, जिससे नशा के लत की शिकार मरीजों की लत धीरे-धीरे छूट सकेगी। जिले में ड्रग्स सहित कई तक जानलेवा नशा की चपेट में आए लोगों की संख्या अधिक है।
इंजेक्शन की लत से कई गंभीर बीमारियों का खतरा : जिले में करीब 200 लोग इंजेक्शन से नशा लेने की पुष्टि हुई। जो समूह बनाकर एक ही इंजेक्शन से आपस में नशा करते हैं। इससे उनमें गंभीर रोग होने की भी आशंका होती है। एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, क्षय रोग समेत कई बीमारियां हो सकती हैं। उन्हें इस नशे से होने वाले संभावित खतरे, जीवन संकट, परिवार की स्थिति, आर्थिक नुकसान, सामाजिक उपेक्षा और जीवन यापन में तकलीफ के बारे में बताया जाएगा ताकि उनकी इच्छाशक्ति मजबूत हो।