सिद्धार्थनगर। डिपो में कुल 53 बसों की उपलब्धता के बावजूद, स्थानीय रूटों पर प्राइवेट वाहनों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है।
इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल-कॉलेज के छात्रों का सरकारी बसों के इंतजार में समय बर्बाद हो रहा है। जबकि बसों को कई रूटों पर संचालित नहीं होने से निजी मैजिक, ऑटो और टैक्सी पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
डिपो में वर्तमान समय में 53 बस हैं। इसमें से 11 गोरखपुर, 10 लखनऊ, तीन दिल्ली, दो प्रयागराज, दो वाराणसी, दो कानपुर, एक झांसी, दो बलरामपुर सहित बस्ती, सोनौली और डुमरियागंज के लिए संचालित होती हैं। जबकि कई ऐसे लिंक रूट हैं, जिस पर प्रतिदिन 20 से अधिक प्राइवेट छोटे बड़े वाहन का संचालन किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि बस डिपो में बसें खड़ी नजर आती हैं, लेकिन लोकल रूट की सड़कों पर उनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। इससे न केवल अधिक किराया देना पड़ रहा है, बल्कि आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं की भी आशंका बनी रहती है।
यात्रियों का कहना है कि रोजाना ऑटो और निजी वैन की भीड़ से जूझना पड़ता है। ऐसे में यात्रियों को कई बार असुविधा व वाहन नहीं मिलने से गाड़ी बुक करके भी जाते हैं, जिससे उन्हें कठिनाई होने के साथ ही अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
क्षेत्र के अविनाश, सुगंध, देवांश व अनिल ने बताया कि बस न मिलने पर आए दिन असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। छोटी बसों के नहीं आने से जिले के लोगों को लोकल रूट पर भी बस की सुविधा नहीं मिल पा रही है।