सिद्धार्थनगर /भनवापुर। फर्जी दस्तावेज के सहारे बेसिक शिक्षा विभाग में सेंधमारी करके शिक्षक बनने वालों की नियुक्ति पूरे योजना का अनुसार होती थी। उन्हें मुख्यालय से दूर भनवापुर, डुमरियागंज, खुनियावं आदि ब्लॉकों में शिक्षा माफिया भेजते थे। जहां जांच की आंच न पहुंचे सके। इसी का नतीजा रहा कि वर्ष 2017-18 में लगी फर्जीवाड़े की आग और जांच अभी तक जारी है।
जिले के भनवापुर ब्लॉक में साल 2024 में 36 नियुक्ति होनी थी। इन सभी शिक्षकों को उन विद्यालयों में नियुक्ति दी गई, जहां पर केवल एक शिक्षक थे। इस दौरान आठ और फर्जी शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर दिया गया। इनकी नियुक्ति उन स्कूलों में की गई, जहां पर तीन से चार शिक्षक पहले से ही थे। जब मामला पकड़ में आया तो ये फर्जी शिक्षक लापता हो गए। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू की तो बेसिक शिक्षा विभाग उनको दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे है, जिससे जांच अभी तक अटकी हुई है। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र फर्जी शिक्षकों के लिए सेफ जोन बन चुका है। सतर्कता और सूझबूझ से किया गया गलत कार्य आसानी से उजागर नहीं होता। सूत्रों के मुताबिक भले ही कुछ नाम उजागर हो गए हैं, लेकिन अभी भी कुछ अध्यापक कूटरचित दस्तावेजों की बदौलत विभाग में पांव जमा रखे हैं। पिछले डेढ़ सालों से कूटरचित दस्तावेज के सहारे नौकरी कर रहे आठ शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, जेल भी भेजे गए, लेकिन मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।
हालांकि त्रिलोकपुर पुलिस सभी फर्जी शिक्षकों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर जांच में जुटी है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों के द्वारा पुलिस को जवाब नहीं देना जांच पर भारी पड़ रहा है। इसी बीच भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय रमवापुर राउत में तैनात शिक्षक शिव शंकर श्रीवास्तव सहित जिले के अन्य पांच संदिग्ध फर्जी शिक्षकों का अभिलेख एसटीएफ के द्वारा मांगा गया है।