बढ़नी। कस्बा बढ़नी और आसपास के क्षेत्रों में 33 केवी हाईटेंशन लाइन में खराबी के कारण करीब 14 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। रात नौ बजे से शुरू हुई कटौती के बाद कुछ देर के लिए बिजली आई लेकिन रात करीब दो बजे मुंहचुरवा नदी के पास 33 केवी लाइन का तार टूट कर गिर गया। इससे लगभग 35 हजार की आबादी उमस भरी गर्मी में रातभर परेशान रही।
बिजली गुल होने से लोग घरों से निकलकर सड़कों और छतों पर टहलते रहे। पंखे और कूलर बंद होने से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक दिक्कत उठानी पड़ी। सुबह तक भी आपूर्ति बहाल नहीं होने से पेयजल और दैनिक कार्य भी प्रभावित रहे।
जेई लालू प्रसाद यादव ने बताया कि रात नौ से दस बजे तक 132 केवी स्तर से निर्धारित एक घंटे की कटौती थी। इसके बाद आपूर्ति वाले क्षेत्र में बारिश होने से रात एक बजे तक बिजली बाधित रही। एक बजे आपूर्ति बहाल होने के करीब एक घंटे बाद मुंहचुरवा नदी के पास 33 केवी लाइन का तार टूट गया, जिससे पूरा फीडर ब्रेकडाउन में चला गया। विभाग की टीम ने मौके पर मरम्मत कार्य शुरू किया और दोपहर करीब 12:30 बजे तक आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया।
स्थानीय निवासी बबलू, हरिश्चंद्र, हरगोविंद मिश्रा और मनोज कुमार समेत कई लोगों ने कहा कि बढ़नी क्षेत्र में बार-बार होने वाली बिजली कटौती से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने विभाग से स्थायी समाधान और निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग की।
बिजली कटौती ने बढ़ाई मुसीबत, रात में टूट रही नींद सुकून भी गायब : शोहरतगढ़। शोहरतगढ़ कस्बा सहित क्षेत्र हजारों गांव के लोगों अघोषित बिजली की कटौती परेशान है। पिछले कुछ दिन से शाम सात बजे से रात्रि साढ़े 12 बजे तक अगल-अलग शिफ्ट में दो घंटे-तीन की रोस्टरिंग के नाम पर बिजली काट दी जा रही है। इससे उमस भरी रात में उपभोक्ताओं की मुसीबत बढ़ गई है और सुकून की नींद के वे लिए परेशान हैं। परसिया पावर हाउस से शोहरतगढ़ कस्बा सहित बरगदवा फीडर, करहिया फीडर और करौती फीडर से बिजली की सप्लाई संचालित की जाती है। इन फीडरों से हजारों गांव में बिजली की आपूर्ति की जाती है। शहरी क्षेत्रों 21 और ग्रामीण में 18 घंटे बिजली सप्लाई का शेड्यूल है लेकिन मौजूदा समय में शेड्यूल के हिसाब से बिजली नहीं मिल पा रही है।
बरगदवा, करहिया और करौती फीडर के उपभोक्ताओं के अनुसार सोमवार को 6:30 से 7:30 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। इसके बाद रात 9:11 से 11:10 बजे तक बिजली रोस्टरिंग के नाम पर बिजली गायब हो गई।
मंगलवार की रात में 10:30 से 12:30 बजे की सप्लाई ठप रही। करीब ढाई घंटे बाद आपूर्ति मिलने के बाद रात 2 बजे फिर बिजली गुल हुई तो भोर 5 बजे बिजली की सप्लाई बहाल हुई। इसी तरह बुधवार को 7 बजे से 9 तक रोस्टरिंग के नाम पर बिजली काट दी गई। पूर्ति बहाल हुई, जिसके बाद 10:30 से 12:30 बजे तक सप्लाई गुल हो गई। लगभग दो घंटे बाद बिजली की सप्लाई आई तो रात दो बजे फिर बिजली कटौती कर दी गई।
क्षेत्र के गणेश, मनु, लकी, राहुल शुक्ला, संदीप, शत्रुहन आदि ने बताया कि दिन में भी थोड़ी-थोड़ी देर में बिजली गुल हो जाती है और थोड़ी देर के आ जाती है लेकिन रात में रोस्टरिंग के नाम पर कई-कई घंटों बिजली कटौती की जा रही है। इससे उमस भरी गर्मी में जीना दुश्वार हो गया है।
इस संबंध में एसडीओ विनोद कुमार ने बताया गर्मी बिजली का भार बढ़ गया है। इसकी वजह से रोस्टरिंग कोड ऊपर आता है। शिफ्टवार एक से डेढ़ घंटे की रोस्टरिंग कई बार की जा रही है।
उमस में रात की रोस्टरिंग बनी आफत, ढेबरुआ-बोहली के उपभोक्ता परेशान : तुलसियापुर। बारिश न होने से बढ़ी उमस के बीच बढ़नी ब्लॉक के ढेबरुआ और बोहली पावर हाउस क्षेत्र में रात्रिकालीन रोस्टरिंग उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। चार दर्जन ग्राम पंचायतों के हजारों उपभोक्ताओं का आरोप है कि रात में रोस्टरिंग और फाॅल्ट के नाम पर छह से आठ घंटे तक बिजली काटी जा रही है, जिससे लोगों की नींद और दिनचर्या दोनों प्रभावित हो रही हैं।
उपभोक्ता शिवकुमार, राहुल शुक्ल, रामदेव अग्रहरि, किशोरी लाल और हफीजुर्रहमान ने बताया कि दिन में बिजली आपूर्ति अपेक्षाकृत ठीक रहती है लेकिन रात होते ही कटौती शुरू हो जाती है। बुधवार शाम करीब 7:15 बजे रोस्टरिंग के नाम पर काट दी गई। रात में केवल 10-15 मिनट के लिए एक-दो बार बिजली आई। इसके बाद पूरी रात फाॅल्ट के कारण आपूर्ति ठप रही और बृहस्पतिवार सुबह करीब 11 बजे बिजली बहाल हुई।
इसी तरह मंगलवार को शाम 6:27 बजे रोस्टरिंग के तहत बिजली काटी गई जो रात करीब 8:30 बजे आई। बाद में रात 10:29 बजे फिर दो घंटे की कटौती हुई और 12:30 बजे आपूर्ति बहाल हुई। इसके बाद रात 1:56 बजे दोबारा रोस्टरिंग की गई और करीब 3:20 बजे बिजली आई। बोहली पावर हाउस क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि वहां भी कमोबेश यही स्थिति है। नेपाल सीमा से सटे इस इलाके में उमस अधिक रहती है और रात में बिजली बंद होने से बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को सबसे अधिक दिक्कत उठानी पड़ रही है।