उसका में रेलवे की जमीन की पैमाइश करते अधिकारी और लेखपाल।
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सिद्धार्थनगर। जिले में मौजूद रेलवे की कई एकड़ भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। जमीन पर कच्चे-पक्के निर्माण करा लिए गए हैं। अब रेलवे ने अपनी भूमि का नए सिरे से चिह्नांकन शुरू किया है तो दर्जनों निर्माण इसकी जद में आने लगे हैं। कहीं रेलवे की भूमि पर पक्के मकान बना लिए गए हैं तो कहीं टिनशेड लगाकर दुकान चलाई जा रही है। शनिवार को रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क) मनोहर कुमार की अगुवाई में रेलवे ने उसका बाजार क्षेत्र में अभियान चलाकर भूमि की पैमाइश कराई। चिह्नांकन के साथ ही अतिक्रमणकारियों को आगाह भी किया गया। रेलवे के इस अभियान से अतिक्रमणकारियों में खलबली मच गई है।
बता दें कि आजादी से पूर्व जिले में गोरखपुर से उसका बाजार के मध्य ही ट्रेनों का संचालन होता था। ट्रेनों के ठहराव और इंजन की दिशा परिवर्तन के लिए रेलवे ने सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहित किया था। पूर्व में यहां पत्थर कोट और माल गोदाम भी हुआ करता था, लेकिन समय बीतने और रेलवे की बेफिक्री के चलते आस-पास के लोगों ने रेलवे की दहलीज पार करते हुए कीमती भूमि अपने कब्जे में ले ली। अब रेलवे ने अपनी भूमि की खोजबीन शुरू की है। शनिवार को उसका बाजार मुख्य चौराहे से रेलवे पुल तक अभियान चलाकर भूमि की पैमाइश कर चिह्नांकन किया गया। पुल के पश्चिम छोर पर उत्तर से दक्षिण दिशा में (ट्रैक समेत) करीब 550 फीट भूमि रेलवे के अधीन है।
आखिरी सिरे पर यह दायरा 350 फीट का है। पैमाइश के दौरान मौके पर आधी भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया। कई स्थानों पर रेलवे की भूमि में ही पक्के मकान पाए गए, जबकि दर्जनों लोग स्थाई निर्माण कराकर निजी हित में उपयोग कर रहे हैं। रेलवे के अफसरों ने अपने दायरे में आने वाली भूमि पर निशान लगाते हुए उसके अंदर के सभी तरह के निर्माण हटाने की हिदायत अतिक्रमणकारियों को दी। कहा कि अगर स्वेच्छा से कब्जा नहीं हटाया गया तो रेलवे खुद निर्माण ध्वस्त कराएगा और इसकी भरपाई कब्जाधारक से की जाएगी। रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क) मनोहर कुमार ने बताया कि चिह्नांकन के बाद दोनों तरफ पिलर स्थापित किया जाएगा, जिससे भूमि की पहचान आसानी से हो सके और उसके अंदर होने वाले कब्जे को रोका जा सके। हालांकि इसके पूर्व भी रेलवे ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी लेकिन कोई स्थायी रोक न होने के कारण लोगों ने फिर कब्जा कर लिया। अभियान में रेलवे के सुरेंद्र कुमार, रवि कुमाऱ्र, लीलाकृष्ण सहित हलका लेखपाल रामशंकर दुबे आदि शामिल रहे।