पहले कार्य कराने, बाद में निविदा निकालने की एसडीएम करेंगे जांच
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में पूर्व में कराए कार्य का बाद में निविदा निकालकर चहेते ठेकेदारों में काम बांटने और सरकारी धनराशि का बंदरबांट करने के मामले की दोबारा जांच होगी। ढाई करोड़ रुपये की लागत से कराए गए आठ कार्यों में अनियमितता की शिकायत के बाद एडीएम उमाशंकर ने इसकी जांच एसडीएम नौगढ़ को सौंपी है।
नगर पालिका ने 13 अक्तूबर 2021 को ढाई करोड़ रुपये की लागत से शहर में आठ विभिन्न कार्यों की निविदा आमंत्रित की गई थी। शहर के रमजान नगर निवासी सुरेंद्र अग्रहरि ने तभी शिकायत की थी कि कम प्रसार वाले समाचार पत्र में जिन कार्यों की निविदा प्रकाशित की गई है, वह पहले से निर्माणाधीन है।
इन कार्यों का बाद में नियम विरुद्ध तरीके से निविदा निकाल चहेते ठेकेदारों में बांट सरकारी धन गबन किया गया है। डीएम से शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम ने इसकी जांच शुरू की थी, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है तत्कालीन एसडीएम विकास कश्यप के पास ईओ का भी अतिरिक्त प्रभार होने के कारण जांच का कोई परिणाम नहीं निकला। आठ माह बाद नगर पालिका में अब जाकर नए ईओ की तैनाती हो सकी है, जिससे वर्तमान एसडीएम नौगढ़ के पास से ईओ का अतिरिक्त कार्यभार हट गया है।
इन कार्यों में अनियमिता की जांच
अनूप नगर में 12.36 लाख से अंत्येष्टि स्थल पर शिव मूर्ति की स्थापना, सिहेंश्वरी मंदिर में 12.36 लाख से छाजन का निर्माण, जमुआर नाले के अंत्येष्टि स्थल पर 13.78 लाख से मिट्टी कार्य व गेट निर्माण, पश्चिम गोला में जलकल परिसर में 16.64 लाख से चहारदीवारी निर्माण की जांच होगी। साथ ही मधुकरपुर में 64.68 लाख रुपये, थरौली में 50.86 लाख व शास्त्रीनगर में 39.11 लाख रुपये से पोखरे के सुंदरीकरण में भी अनियमितता के आरोप हैं।
तत्कालीन ईओ पर थे अनियमितता के आरोप
तत्कालीन ईओ शैलेंद्र कुमार पर नगर पालिका सिद्धार्थनगर में कराए कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे थे। यहां तक कि नगर विकास अनुभाग के विशेष सचिव संजय कुमार सिंह यादव व उप सचिव बृजेंद्र सिंह की ओर से 13 अक्तूूबर 2021 को भेजे गए ईओ के स्थानांतरण पत्र में भी नगर पालिका में अनियमितता की जांच लंबित होने और निष्पक्ष जांच कराने के लिए ही उनका स्थानांतरण होना बताया गया था।
पहले जांच से किया था इनकार
नगर पालिका में अनियमितता के मामले की जांच करने से वर्तमान एसडीएम नौगढ़ प्रदीप यादव ने पहले यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनके पास ईओ का अतिरिक्त कार्यभार है, जिससे जांच करना उनके लिए उचित नहीं होगा। वर्तमान में उनके पास से ईओ का चार्ज हट गया है, जिसका हवाला देते हुए एडीएम ने उन्हें जांच अधिकारी नामित करते हुए रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।