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दायरा डेढ़ सौ किलोमीटर, आग बुझाने को महज तीन टैंकर

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दायरा डेढ़ सौ किमी, आग बुझाने को महज तीन टैंकर
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जिले के 2800 वर्ग किमी क्षेत्रफल में नाकाफी है आग बुझाने के संसाधन
पांच में सिर्फ दो तहसीलों में संचालित है अग्निशमन केंद्र, कर्मियों की है कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गर्मी का मौसम आने के साथ ही खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां ज्यों-ज्यों पककर तैयारी हो रही हैं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रही हैं। जिले में पूरब से पश्चिम अथवा उत्तर से दक्षिण तक 150 किमी के दायरे में टैंकर समेत सिर्फ तीन अग्निशमन वाहन होने से किसान फसल की सुरक्षा को लेकर सशंकित है।
जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित लोटन ब्लॉक के जिगनिहवा, पिकापार से पश्चिम में भनवापुर ब्लॉक के सिंगारजोत, सिकंदरपुर गांव के बीच दूरी 150 किमी है। जिले के उत्तर में बढ़नी ब्लॉक के बनचौरा, लोहाटी गांव और दक्षिण में खेसरहा ब्लॉक के बेलवा, महुआ गांव के बीच की दूरी भी 150 किमी से अधिक है। ऐसे में जिले के 2800 वर्ग किमी क्षेत्रफल में आबादी और गैर आबादी में स्थित कृषि क्षेत्र को आग से बचाने के लिए संसाधनों की बेहद कमी है। पांच तहसीलों में सिर्फ नौगढ़ एवं और डुमरियागंज में ही अग्निशमन केंद्र स्थापित है। इसमें नौगढ़ केंद्र पर फायर ब्रिगेड के टैंकर सहित दो गाड़ियां और मौके पर पानी मिलने पर काम करने वाली गाड़ियां उपलब्ध हैं। डुमरियागंज में स्थित केंद्र पर एक टैंकर समेत गाड़ी और एक मौके पर पानी मिलने पर आग बुझाने के लिए जीप उपलब्ध है। किसान मणिकांत तिवारी, रामशरण, कैलाश दुबे और रामदेव यादव का कहना है कि इतने कम संसाधन के कारण ही आग लगने की सूचना के बावजूद समय से अग्निशमन वाहन नहीं पहुंचते हैं, जिससे कई बीघे फसल नष्ट हो जाती है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) अनिल कुमार सिंह कहते हैं कि उपलब्ध संसाधनों से जिले के सभी क्षेत्र में आग बुझाने के लिए विभागीय कर्मी तत्पर हैं जहां भी सूचना मिलती त्वरित कार्रवाई की जाती है। अगर कहीं भी आग लगने की घटना होती है तो नजदीकी केंद्र पर सूचना दें।
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आग लगने पर यहां दें सूचना
नौगढ़ केंद्र के मोबाइल नंबर 9454418810 और डुमरियागंज केंद्र के मोबाइल नंबर 9454418812 पर सूचना दें।
प्रतिवर्ष 15 हजार हेक्टेयर फसल में लग जाती है आग
जिले में 1.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल बुवाई होती है जबकि आग बुझाने के संसाधनों की कमी और समय से उपलब्धता नहीं होने से प्रत्येक वर्ष अगलगी से हजारों एकड़ फसल नष्ट होती है। वर्ष 2018 में 17 हजार हेक्टेयर, 2019 में 19 हजार हेक्टेयर, 2020 में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल खड़ी गेहूं की फसल आग से जलकर नष्ट हो गई थी। इस वर्ष भी 1.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल की बुवाई हुई है और आग से फसल की सुरक्षा के लिए चिंतित किसानों की सांस अटकी रहती है।
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तीन तहसीलों में नहीं है कोई संसाधन
जिले के पांच तहसीलों में तीन तहसीलों बांसी, इटवा और शोहरतगढ़ में न तो अग्निशमन केंद्र है और न ही यहां पर आग बुझाने का कोई संसाधन है। पांच वर्ष पूर्व सभी तहसीलों में अग्निशमन केंद्र स्थापित करने की योजना अब तक यहां लागू नहीं हो सकी है। वहीं अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों की भी कमी है। यहां पांच हवलदार तैनात हैं जबकि 36 फायरमैन के सापेक्ष मात्र 26 फायरमैन और छह की जगह चार ड्राइवर उपलब्ध हैं। सीएफओ बताते हैं कि बांसी तहसील में अग्निशमन केंद्र स्वीकृत हो चुका है, इटवा और डुमरियागंज में अग्निशमन केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।
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