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खुशी से फूले नहीं समा रहा ‘नंगातलाई का गांव’

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नंगातलाई का गांव अब कस्बे में तब्दील वाली खबर में... डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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खुशी से फूले नहीं समा रहा ‘नंगातलाई का गांव’
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‘अमर उजाला’ के ‘आकाशदीप सम्मान’ के लिए डॉ. विश्वनाथ का चयन
पैतृक गांव बिस्कोहर समेत जनपद के शुभचिंतकों में खुशी की लहर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अमर उजाला की ओर से शब्द सम्मान 2020 के तहत जिले के बिस्कोहर निवासी डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को ‘आकाशदीप सम्मान’ से नवाजा जाएगा। उनके नाम का चयन होने से पैतृक गांव के लोगों समेत जनपदवासियों में काफी खुशी है।
प्रख्यात आलोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी लंबे समय से दिल्ली में ही रह रहे हैं। ‘नंगातलाई का गांव’ में उन्होंने बिस्कोहर के ग्राम्य जीवन की छटा को परिलक्षित किया है। नंगातलाई और कोई नहीं बल्कि डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी स्वयं हैं। परिवर्तित होते हुए ग्राम्य जीवन के विविध पक्षों को उकेरने में वह सफल रहे हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा बिस्कोहर में, उच्च प्राथमिक की शिक्षा बहन के घर बलरामपुर जिले में हुई। उच्च शिक्षा के लिए कानपुर चले गए। वहां उन्हें फिल्मों का शौक लग गया। राजकपूर और दिलीप कुमार की फिल्में उन्होंने खूब देखी है। परास्नातक उन्होंने बीएचयू से किया, जहां उनका गहरा लगाव गुरुदेव आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी से हुआ। ‘संदेश रासक’ का संपादन उन्होंने आचार्य द्विवेदी के साथ किया है। ‘हिंदी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास’ को हिंदी की हनुमान चालीसा समझना चाहिए। उन्होंने इसमें गागर में सागर भरा है। कुछ कहानियां, कुछ विचार में उन्होंने कहानियों की आलोचना लिखी है। ‘जैसा कह सका’ में उनकी कविताएं संकलित हैं। पीएचडी की उपाधि उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से मिली। पढ़ाई के बाद 1958 को देवी सिंह बिष्ट महाविद्यालय नैनीताल में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुए। लगभग एक वर्ष के बाद ही 1959 को किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली में नियुक्त हो गए। कालांतर में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर में अध्यापन करने लगे और 1996 को सेवानिवृत्त हो गए। उन्हें अब तक गोकुल चंद्र शुक्ल आलोचना, डॉ. रामविलास शर्मा, सोवियत लैंड नेहरू, साहित्य सम्मान-हिंदी अकादमी, शांति कुमारी वाजपेयी सम्मान, शमशेर सम्मान, मैथिली शरण गुप्त सम्मान, व्यास सम्मान, भाषा सम्मान, मूर्तिदेवी सम्मान, भारत भारती सम्मान मिल चुका है।
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महान शख्सियत पर बुद्ध भूमि को गर्व
शहर के निवासी और साहित्यकार विनयकांत मिश्र ने कहा कि गुरुजी को आकाशदीप सम्मान के लिए चयनित किया जाना सुखद है। वर्ष 2000 में उनके संपर्क में आया। गृह जिले का होने के कारण उनका बेहद लगाव रहा। उनके इस सम्मान से समूचा हिंदी जगत बेहद गौरवान्वित है। शिक्षक और कवि नियाज कपिलवस्तुवी ने आकाशदीप सम्मान के लिए चयनित विश्वनाथ त्रिपाठी की महान शख्सियत पर बुद्ध भूमि को गर्व है। उन्होंने वर्ष 2014 में एक राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित एक कविता पढ़कर फोनकर ठेठ अवधी बोली में उत्साहवर्धन किया था। एक अदने से कलमकार के प्रति यह सहृदयता निश्चित रूप से उनके महान रचनात्मक दृष्टिकोण का परिचायक है। बिस्कोहर निवासी प्रभात जायसवाल का कहना है कि गांव में 365 मंदिर और कुंआ धरोहर हैं, उसी तरह विश्वनाथ त्रिपाठी गांव के सामाजिक धरोहर है। खुशी जाहिर करते हुए बिस्कोहर निवासी ने दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि बड़े पिता को आकाशदीप सम्मान देने के निर्णय से परिवार का हर सदस्य खुश है।
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