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परिषदीय स्कूलों के बच्चों को घर पर मिलेंगी किताबें

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परिषदीय स्कूलों के बच्चों को घर पर मिलेंगी किताबें
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अब मनरेगा के तहत भी हो सकेगा स्कूलों का कायाकल्प
प्राइवेट विद्यालय खोलने के लिए शुल्क में काफी कमी की
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि परिषदीय स्कूलों के बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए सरकार ने पाठ्य-पुस्तकों को उनके घर पर ही पहुंचाने का निर्णय लिया है। विद्यालयों को खोलने पर केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने के बाद ही विचार किया जाएगा।
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डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने शनिवार को लोक निर्माण विभाग के रेस्टहाउस में ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत की। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन घोषित होने के बाद से अब तक ऑनलाइन के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित की गई। स्कूलों के बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षकों के माध्यम से अभिभावकों तक पाठ्य-पुस्तकों को घर-घर पहुंचाने के लिए बीएसए को निर्देश दिए गए हैं। सप्ताह भीतर किताबें पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। विद्यालयों की खराब दशा सुधारने के लिए कायाकल्प योजना में तेजी लाने की तैयार की जा रही है। स्कूलों की छत, फर्श, प्लास्टर, दरवाजा, खिड़की मरम्मत, चाहरदीवारी, स्मार्ट क्लास, नया ब्लैक बोर्ड, सीमेंट का बेंच, रसोई घर जैसे 14 बिंदुओं के कार्य होंगे। पहली बार मुख्यमंत्री ने इन कार्यों के लिए कायाकल्प योजना के साथ मनरेगा से भी धनराशि खर्च करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रस्ताव देना होगा। बेरोजगारों को रोजगार देने की के लिए प्राइवेट स्कूलों के खोलने में निर्धारित शुल्क और जमानत राशि को भी घटा दिया गया है। प्राथमिक स्तर के लिए एक लाख एवं जूनियर स्तर के लिए डेढ़ लाख के स्थान पर क्रमश: 10 और 15 हजार रुपये किया गया है। जबकि जमानत राशि दोनों स्तर के लिए 25 हजार कर दिया गया है।
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