खामपार। गोरखपुर जिले के रामगढ़ ताल पुलिस के गिरफ्त में आए खामपार थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव निवासी संजीव कुशवाहा पर खामपार थाने में नेटुआ वीर निवासी एक युवक की हत्या का आरोप है। उस मामले में संजीव जेल भी जा चुका है और इस समय जमानत पर बाहर है। इस पर पुलिस गैंगस्टर एक्ट की भी कार्रवाई की है। वह शान शौकत वाली जिंदगी जीने का आदी है।
बताते चलें कि क्रिप्टो करेंसी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने के मामले में रामगढ़ताल पुलिस के हत्थे चढे संजीव कुशवाहा 11 जून 23 को नेटुवावीर चौराहे पर नेटुवावीर निवासी बैरिस्टर यादव की हत्या के मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ा और लगभग चार माह जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आया।
कंपनी बनाकर लोगों से रुपये ठगी करने के मामले में बैरिस्टर यादव से पैसा के लेनदेन को लेकर संजीव कुशवाहा की ठन गई थी। जानकार बताते हैं कि बैरिस्टर यादव ने अपने सहित कुछ अपने रिश्तेदारों का रुपये भी संजीव के कहने पर जमा कराया था। जिस रुपये की वापसी को लेकर संजीव व बैरिस्टर में तनातनी चल रही थी। आरोप है कि शूटरों के जरिए बैरिस्टर की हत्या करा दी गई। उस मामले में बैरिस्टर यादव के बड़े भाई वीर बहादुर यादव के तहरीर पर संजीव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और संजीव सहित उसके कुछ अन्य सहयोगी जो इस हत्या में शामिल रहे पुलिस के गिरफ्त में आए। खामपार पुलिस ने हत्या में शामिल इन अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की।
संजीव कुशवाहा का इन फर्जीवाड़े से पुराना नाता है और उसके गिरोह में दर्जनों युवक काम करते हैं जो बिहार मुजफ्फरपुर से लेकर लखनऊ गोरखपुर देवरिया राजस्थान, गुजरात तक फैले हुए हैं। इन्हीं फर्जीवाड़ा के चलते संजीव ने काफी संपत्ति भी बनाई है, लेकिन यह संजोग रहा है कि वह कभी पुलिस के हत्थे इन फर्जीवाड़ा मामलो में नहीं चढ़ा, कहीं-कहीं शिकायत आई तो उसको उसने मैनेज किया।