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दूरी 13 किलोमीटर किराया लगता है 50 रुपये

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13 किलोमीटर का 50 रुपये किराया
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बांसी-धानी मार्ग पर रोडवेज की बस नहीं होने से यात्रियों का शोषण
क्षेत्र के लोग कई बार कर चुके हैं रोडवेज की बस चलाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
खेसरहा। बांसी-धानी होते हुए गोरखपुर को जोड़ने वाली 13 किलोमीटर सकारपार तक जाने के लिए यात्रियों को 50 रुपये किराया देना पड़ रहा है। प्राइवेट बस संचालक यात्रियों का शोषण कर रहे हैं। कई बार लोग रोडवेज बस चलाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।
बांसी जिले के मुख्य बाजार में शामिल है। यहां खेसरहा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों का नियमित आना-जाना होता है। साथ ही बांसी सकारपार-धानी होते हुए लोग बस से गोरखपुर जाते है। मगर इस मार्ग पर एक भी रोडवेज की बस नहीं चलती है। प्राइवेट बस से क्षेत्र के लोगों को यात्रा करना पड़ता है। लोगों के मुताबिक 13 किलोमीटर के सफर का 50 रुपये का किराया देना पड़ता है। अगर रोडवेज की बस चलती तो निर्धारित किराया लगता। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुमार पांडेय ने सक्षम अधिकारियों को पत्र देकर बांसी से सकारपार होते हुए गोरखपुर तक लिए सरकारी बसों के संचालन की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि लगभग सात वर्ष पूर्व इस मार्ग पर सरकारी बसों का आवागमन बांसी से पेंडारी बुजुर्ग तक किया जाता था। जिससे क्षेत्र के लोगों को आने-जाने में जहां सुविधा मिलती रहे। वहीं विभाग के आय में बढ़ोतरी भी होती रही। मगर कुछ लोगों के दबाव परिवहन विभाग ने इस मार्ग पर बसों का आवागमन बंद कर दिया। इस कारण लोगों को मजबूरी में प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है जहां भूसे की तरह यात्रियों को ठूंसकर ले जाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लोगों के जेब पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस संचालन जल्द शुरू नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन किया जाएगा। क्षेत्र के ही रमेश कुमार ने कहा कि रोडवेज की बस चलाने से क्षेत्र के लोगों को सहूलियत मिलती और समय से आ जा सकते हैं। मगर कोई समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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गोरखपुर जाने के लिए जाना पड़ता है धानी
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गोरखपुर जाने के लिए सकारपार सहित अन्य गांव के लोगों को धानी तक जाना पड़ता है। वहां से बस या फिर साधन से गोरखपुर जाते हैं। अगर रोडवेज की बस चलती तो लोग अपने घर के पास से ही आराम से यात्रा कर लेते। समय से घर भी पहुंच जाते है। परिवहन विभाग को इस पर ध्यान देने की जरुरत है।
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बांसी-धानी मार्ग की जांच की गई थी। मार्ग सिंगल होने के कारण रोडवेज की बस के आने-जाने में दिक्कत होगी। इसलिए वहां पर रोडवेज बस नहीं चलाया जा सकता। बस्ती से एक बस अनुबंधित किया गया था। मगर सड़क सिंगल होने के कारण वह भी नहीं चलती है।
- जगदीश प्रसाद एआरएम रोडवेज नौगढ़
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