कार्तिक पूर्णिमा पर बुधवार को जिले की महत्वपूर्ण नदियों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पूजा-अर्चन के बाद लोगों ने अन्नदान कर अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
ब्रह्ममुहूर्त से ही छोटी-बड़ी नदियों में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। यह क्रम दोपहर तक जारी रहा। इस दौरान जगह-जगह लगे मेलों का भी बच्चों ने भरपूर लुत्फ उठाया।
बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही घाट पर दशकों से लगने वाले पारंपरिक मेले की रौनक इस बार भी सबसे जुदा रही। मेला स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी और लोग खाने-पीने के स्टालों पर जमे रहे। इसके अलावा महिलाएं जरूरत के सामानों की खरीदारी करती नजर आईं। सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में देखा गया।
खाने पीने के सामानों के अलावा वे खिलौनों की दुकानों ने उन्हें खूब आकर्षित किया। कपिलवस्तु क्षेत्र के मझौली सागर, मरथी सागर, संत घाट, बरगदी स्थित नदियों में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। जिले के बर्डपुर, शोहरतगढ़, उसका, इटवा सहित अन्य क्षेत्रों में भी कार्तिक पूर्णिमा की धूम रही।
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राप्ती नदी के तट पर रानी मोह भक्त लक्ष्मी घाट पर बुधवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
भोर से ही नगर व ग्रामीण अंचलों की महिलाओं का जत्था गीत गाते हुए नदी के तट पर पहुंचने लगा। यह सिलसिला दिन में 11 बजे तक जारी रहा। स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने दीप दान, अन्न दान, गोदान किया। इस दौरान बाबा चन्द्रभान दास, राम शरन मौर्या, हरिगोविन्द साहू समेत प्रशासन भी मुस्तैदी से डटा रहा। इसी तरह श्रद्धा की देवी योग माया के स्थान व राप्ती नदी के तट, खरिका पाण्डेय गांव, चरथरी में भव्य मेला लगा। ककरही मेला में भेड़ की लड़ाई देख व आल्हा सुनकर लोगों ने खूब मनोरंजन किया।