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Siddharthnagar News: पांच ऑपरेटर पर 50 बेड के वेंटिलेटर की जिम्मेदारी

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जिला अस्पताल में स्थित आईसीयू वार्ड में भर्ती बच्चे का को देखती स्वास्थ्य कर्मी। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पांच ऑपरेटर पर 50 बेड के वेंटिलेटर की जिम्मेदारी
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जिला अस्पताल में संसाधन के बावजूद ऑपरेटर की कमी बनी चुनौती
डॉक्टरों के अनुसार 10 से 12 ऑपरेटर जरूरी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जिले में संसाधन पर्याप्त हैं, लेकिन उसे चलाने वाले ऑपरेटरों की कमी व्यवस्था पर भारी पड़ सकती है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में 50 वेंटिलेटर युक्त बेड की व्यवस्था की गई है। लेकिन इसे चलाने वाले मात्र पांच ऑपरेटर हैं, जबकि डॉक्टरों के अनुसार 10 से 12 ऑपरेटर होने चाहिए। ऐसे में पांच लोग अलग-अलग बने दो वार्ड को कैसे संचालित करेंगे। यह तैयारी पर बड़ा सवाल है। वहीं जिन कंधों पर संचालन की जिम्मेदारी है, उनका तर्क है कि जब जरूरत पड़ेगी तो कर्मियों की तैनाती की जाएगी। जो आग लगने पर कुंआ खोदने वाली कहावत को चरित्रार्थ कर रहा है।
कोरोना का संक्रमण चीन समेत कई देशों के साथ ही भारत में भी दस्तक दे चुका है। संक्रमण बढ़ने पर स्थिति काबू में रहे, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय तैयारियों पर जोर दे रहा है। कारण पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में कोरोना की चपेट में आकर बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जिले में भी 100 लोग की मौत हुई थी। इसमें वेंटिलेटर की व्यवस्था का न होना और ऑक्सीजन की कमी मुख्य वजह बनी थी। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों का कहना था। यह स्थिति दोबारा सामने न आए और किसी की जान न जाने पाए। इसके लिए शासन की ओर से वेंटिलेटर युक्त बेड और ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। कोरोना संक्रमण की आहट के बीच एक बार फिर तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल कैंपस में एक 20 बेड का वेंटिलेटर युक्त वार्ड बनाया गया है। जबकि एमसीएच विंग में 30 बेड का वेंटिलेटर युक्त वार्ड तैयार किया गया है, लेकिन इसका संचालन करने वालों की कमी है। 50 बेड के सापेक्ष यहां मात्र पांच ऑपरेटर हैं। ऐसे में दो स्थानों पर कैसे संचालन करेंगे, यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की माने तो एक ऑपरेटर के जिम्मे तीन से पांच बेड के संचालन की जिम्मेदारी होनी है। उनकी तैनाती को लेकर अभी कोई लिखापढ़ी नहीं की गई है। अगर विषम परिस्थिति आती है तो दूसरी लहर जैसे हालात उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी भी ऑपरेटर पर ही
जिन ऑपरेटरों को वेंटिलेटर का संचालन करना है, उन्हीं के जिम्मे तीन ऑक्सीजन प्लांट से बेड पर ऑक्सीजन आपूर्ति करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में वे कैसे कार्य कर सकेंगे? इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति के बावजूद ऑपरेटर की कमी बनी हुई है, जबकि कोरोना की तीन लहरों के दौरान चिकित्सकों ने भयावह स्थिति को करीब से महसूस किया है।
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बंद हो जाएगा एसएनसीयू का संचालन
जिन ऑपरेटर को वेंटिलेटर चलाने के लिए कहा गया है। वह पिछले कई साल से जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड का संचालन शिफ्टवार कर रहे हैं। 15 बेड के वार्ड में मशीन के संचालन के साथ ही बेडों तक ऑक्सीजन पहुंच रहा है कि नहीं, इसकी निगरानी करते हैं। जिससे बेहतर संचालन हो सके। बिजली कटने पर यहां हमेशा ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में अगर वेंटिलेटर चलाने के लिए उन्हें लगा दिया जाएगा तो 15 बेड का वार्ड संचालित होने में समस्या उत्पन्न होगी।
बोले अधिकारी
ऑपरेटर की कमी है, यह मामला संज्ञान में है। जब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ेगी और जरूरत पड़ने पर ऑपरेटर तैनात कर दिया जाएगा।
डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ सिद्धार्थनगर
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