शोध प्रकाशन के बाद कुलपति प्रो. पूनम टंडन से मिलते शोधार्थी व शोध निर्देशक
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. आमोद राय एवं उनकी शोधार्थी जेहरा शमशीर का शोध पत्र ''इकोलॉजी, एनवायरनमेंट एंड कंजर्वेशन'' जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें पर्यावरण संरक्षण पर विस्तृत अध्ययन किया गया है। शोध में बताया गया है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए साहित्य, विज्ञान व मीडिया की वैचारिकी अहम है।
इस शोध में एडवर्ड विल्सन की कृति ''हॉफ अर्थ : आवर प्लैनेट्स फाइट फॉर लाइफ'', रामचंद्र गुहा की कृति ''स्पीकिंग विद नेचर : द ओरिजिन ऑफ इंडियन एनवायरनमेंटलिज्म'' और ''नाओमी क्लेन ऑन फायर : द बर्निंग केस फॉर ए ग्रीन न्यू डील'' का भी तुलनात्मक अध्ययन कर यह बताने का प्रयास किया है कि मानव केंद्रित चिंतन को किनारे कर वसुधा केंद्रित नीतियां बनाने का यह सर्वश्रेष्ठ समय है। साहित्य, विज्ञान व मीडिया की वैचारिकी से अलग इनपुट प्राप्त करते हैं तो वह उतना फलदायी नहीं होगा।
प्रो. आमोद ने बताया कि ''एनवायरनमेंटल डिस्कोर्स इन सिलेक्टेड टेक्स्ट्स ऑफ साइंस, मीडिया एंड लिटरेचर'' शीर्षक से यह शोध पत्र अप्रैल के अंक में प्रकाशित हुआ है। ''इकोलॉजी, एनवायरनमेंट एंड कंजर्वेशन'' क्यू-1 कैटेगरी का जर्नल है। दावा किया कि विश्वविद्यालय के कला संकाय के किसी भी प्राध्यापक के लिए यह पहला अवसर है जब उनका शोध पत्र इतने उच्चीकृत मानक युक्त शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि आगे भी ऐसे प्रकाशन होते रहेंगे। विभागाध्यक्ष प्रो सुनीता मुर्मू, प्रो आलोक कुमार, प्रो अजय शुक्ल, प्रो. गौरहरि बेहरा, प्रो. अवनीश राय, प्रो. शिखा सिंह आदि ने प्रसन्नता भी बधाई दी।