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नहीं हुआ विनियमित क्षेत्र का विस्तार : शहर में शामिल पकड़ी, फिर भी नहीं बन रहा नक्शा

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शहर में हो रहा अनियोजित निर्माण। संवाद
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: विनियमित क्षेत्र नौगढ़ का सर्वे व सीमा विस्तार के साथ बननी थी नई महायोजना-2031
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: चार वर्ष पूर्व समाप्त हो चुकी है महायोजना-2021, टेंडर के बाद सर्वे में देरी कर रही कंपनी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विनियमित क्षेत्र नौगढ़ (नगर पालिका सिद्धार्थनगर) के नियोजित विकास के लिए बनी महायोजना-2021 की समय सीमा चार वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में विनियमित क्षेत्र का न तो सर्वे हो सका और न ही सीमा विस्तार, जिससे नई महायोजना-2031 बनने में देरी हो रही है। इस बीच तीन वर्ष पहले नगर पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार होने से कई गांव इसमें शामिल हो गए हैं।
महायोजना में शामिल हुए राजस्व ग्राम पकड़ी के विनियमित क्षेत्र में शामिल न होने से यहां निर्माण के लिए नक्शा नहीं बन रहा है, जिससे यहां बिना नक्शा पास कराए प्रत्येक माह नए मकान व संस्थानों का निर्माण हो रहा है। जो बाद में शहर के सुनियोजित विकास में बाधा बन सकता है। इससे यहां सामुदायिक सुविधाओं के विकास के दौरान नगर निकाय व प्रशासन को दिक्कत हो सकती है।
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पकड़ी निवासी मनोज राय बताते हैं कि महायोजना में विनियमित क्षेत्र में नियमानुसार नक्शा पास कराकर निर्माण कार्य होते, जिससे सामुदायिक सुविधाओं के लिए भूमि आरक्षित होने का भी लाभ मिलता। बाद में विनियमित क्षेत्र का विस्तार होने पर तमाम अड़चनें आने की संभावना रहेगी। शहर के सुनियोजित विकास के लिए वर्ष-1978 में तत्कालीन बस्ती जनपद के नौगढ़ तहसील मुख्यालय एवं आसपास के 34 राजस्व ग्रामों को शामिल करते हुए 15 नवंबर को विनियमित क्षेत्र नौगढ़ बनाने की अधिसूचना जारी की गई थी।
इसके बाद जुलाई, 2003 को इसमें आसपास के छह गांव और जोड़ दिए गए। विनियमित क्षेत्र में शामिल इन 40 गांवों के सुनियोजित व समग्र विकास के लिए महायोजना-2021 बनाई गई थी। इसमें शामिल क्षेत्र की भूमि की उपयोगिता निर्धारित की गई थी। इस महायोजना के लिए 24 वर्ष पूर्व 2002 में विनियमित क्षेत्र का सर्वे हुआ था। महायोजना-2031 बनाने के लिए इसमें पूर्व में शामिल क्षेत्र और विस्तार के बाद शामिल होने वाले क्षेत्र का सर्वे होना है। तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम की अध्यक्षता में कमेटी ने सर्वे कंपनी रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर का चयन किया। इसके लिए विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण की ओर से चयनित की गई सर्वे कंपनी को निर्धारित धनराशि 13 लाख में से पहली किस्त चार लाख रुपये आवंटित कर दिए गए।
इसके ढाई वर्ष बाद भी कंपनी ने सर्वे शुरू नहीं किया। जबकि बीते चार वर्ष में शहरी क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से बसावट बढ़ गई है, जिससे बाद में सर्वे कर महायोजना बनाने में सड़क, पार्क व स्कूल आदि के लिए स्थल निर्धारित करने में मुश्किलें आएंगी।
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नगर पालिका क्षेत्र से बड़ा होगा विनियमित क्षेत्र का दायरा
तीन वर्ष पूर्व हुए सीमा विस्तार से पहले नगर पालिका सिद्धार्थनगर का क्षेत्रफल विनियमित क्षेत्र नौगढ़ में शामिल 40 गांवों से छोटा था। अब विस्तार के बाद नगर पालिका के बढ़े क्षेत्र को भी महायोजना में शामिल करना होगा। इसमें नगर पालिका में शामिल हुए पकड़ी समेत कई गांव ऐसे हैं जो विनियमित क्षेत्र में शामिल नहीं हैं। अब नई महायोजना में वर्तमान शहरी क्षेत्र की भूमि उपयोग तय करने के साथ ही विनियमित क्षेत्र के विस्तार के लिए भी सर्वे होगा। इससे विनियमित क्षेत्र का दायरा 40 से बढ़कर 50 अथवा 55 हो जाएगा, जो नगर पालिका क्षेत्र से बड़ा हो जाएगा।
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अभी विनियमित क्षेत्र में शामिल हैं ये राजस्व गांव
वर्तमान में विनियमित क्षेत्र नौगढ़ में 40 राजस्व गांव शामिल हैं, जिनमें पोखरभिटवा, दतरंगवा, बर्डपुर नंबर 14, पटनी जंगल, धौरीकुइयां, रोवापार, थरौली, बेलसड़, जगदीशपुर, तेतरी बाजार, मुड़िला, बसडिलिया, डुमरिया, मधुकरपुर, सनई लंगड़ी, सनई खुर्द, भरसड़वा, परसा शाह आलम, खजुरिया, महदेवा लाल, रेहरा, सेमरनार, भीमपार, पिठनी खुर्द, बड़गो, केसारी, बसौना, मेहनाग, साड़ी, घरवासपुर, केसर, पिपरसन, पिठनी जुजुर्ग, सिसहनिया, सकतपुर, सोनवल, पिपरा पांडेय, विनयका, बभनी खुर्द, परसा महापात्र शामिल हैं।
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महायोजना में तय होना है भू-उपयोग
विनियमित क्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए बनने वाली महायोजना में संपूर्ण भूमि को शामिल करते हुए भू-उपयोग सुनिश्चित किया जाता है। इसके तहत पहले संबंधित क्षेत्र की संपूर्ण आराजी शामिल करते हुए बेस मैप बनाया जाएगा। इसमें संपूर्ण भू-भाग में सड़क, जल निकासी नाला, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, औद्योगिक एवं व्यावसायिक और सरकारी कार्यालय समेत विभिन्न उपयोग के लिए अलग-अलग भूमि चिह्नित कर दी जाती है। महायोजना तैयार होने के बाद स्थानीय प्रशासन एवं नगर निकाय के ऊपर इस रोडमैप के आधार पर ही नगर में विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी होती है।
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अनियोजित विकास से होगी परेशानी
भले ही विनियमित क्षेत्र नौगढ़ की महायोजना-2021 बनी थी, लेकिन इसमें चिह्नित ग्रीन बेल्ट, पार्क अथवा अन्य कार्य के लिए चिह्नित भूमि पर तेजी से नए निर्माण हो रहे हैं। वर्ष 2004 की रिपोर्ट के अनुसार महायोजना में इंदिरानगर में करबला के पास और बेलसड़ मोहल्ले में प्रस्तावित पार्क की भूमि में मकान बन गए हैं। इसी तरह बर्डपुर मार्ग पर प्रस्तावित बस अड्डा और विद्युत उपकेंद्र के लिए चिह्नित भूमि पर मकान बन गए हैं। बांसी मार्ग पर प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर और विभिन्न महत्वपूर्ण सड़कों के स्थान पर भी मकान बन गए हैं। इससे शहर के सुनियोजित विकास के लिए नई महायोजना बनाने में दिक्कत होगी।

यहां तैयार हो रही कॉलोनियां
विनियमित क्षेत्र नौगढ़ में सिंहेश्वरी मंदिर के आसपास, बसडिलिया, भीमापार, पकड़ी, मधुकरपुर, सनई, थरौली व जगदीशपुर समेत विभिन्न स्थानों पर तेजी से नई कॉलोनियां बन रही हैं। जबकि महायोजना-2021 में इन स्थानों पर अलग-अलग कार्य होने प्रस्तावित थे। सर्वे में देरी और इन बेतरतीब बसावट के कारण नई महायोजना बनाने में दिक्कत होगी। इससे पहले से ही अनियोजित तरीके से बस रहे कॉलोनियों की भूमि सड़क, पार्क अथवा ग्रीन बेल्ट समेत दूसरी योजनाओं के लिए प्रस्तावित नहीं किए जा सकेंगे।
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विनियमित क्षेत्र नौगढ़ की महायोजना के सर्वे के लिए चयनित कंपनी को कार्य में तेजी लाकर पूर्ण करने के निर्देश दिए जाएंगे, जिससे शहर के विकास को गति मिल सके। इसके लिए संबंधित कंपनी को रिमाइंडर भेजा गया है, फिर भेजा जाएगा।
-आरएन कन्नौजिया, जेई, विनियमित क्षेत्र नौगढ़
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