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राशन वितरण में ई- पॉज मशीन बन रही बाधा

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राशन वितरण में ई-पॉज मशीन बन रही बाधा
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- नेटवर्क में दिक्कत से नहीं लगा पा रहा उपभोक्ताओं का अंगूठा
- घंटो बैठने के बाद वापस होने को मजबूर हो रहे कार्ड धारक, सीमावर्ती क्षेत्रों में परेशानी और बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। राशन वितरण में ई-पॉज मशीन बाधा बनती जा रही है। कहीं मशीन में खराबी तो कहीं नेटवर्क में दिक्कत आने से उपभोक्ताओं का अंगूठा नहीं लग पा रहा है। ऐसे में राशन की दुकान पर इंतजार करके उपभोक्ताओं को निराश लौटना पड़ रहा है। वहीं कुछ उपभोक्ता तो कोरोना के डर से मशीन पर अंगूठा लगाने से भी कतरा रहे हैं। मगर जिम्मेदार उपभोक्तओं की समस्या से गंभीर नहीं हैं।
कोरोना का प्रकोप बढ़ने के बाद लॉकडाउन घोषित कर दिया। संक्रमित होने के डर से लोग घरों में कैद हैं। ऐसे में शासन ने राशन कार्ड धारकों को माह में दो बार राशन वितरण करने का निर्णय लिया है। उपभोक्ताओं को माह की छह और 15 तारीख को राशन वितरण किया जाना है। छह तरीख में गेहूं और चावल जबकि 15 तारीख को मात्र चावल का वितरण होना है। लॉकडाउन के कारण रोगजार ठप होने से मजदूर तबके के समक्ष भोजन का संकट है। ऐसे में राशन के उनके लिए संजीवनी से कम नहीं है। मगर उपभोक्ताओं के लिए ई-पॉज मशीन बाधा साबित हो रही है। लोग घंटों राशन की दुकान पर लाइन लगाकर बैठे रहते हैं। मशीन में नेटवर्क न आने के कारण अंगूठा नहीं लग पाता और उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। नगर निवासी सीमा, पुष्पा, रेहाना आदि का कहना है कि दुकान पर जाते हैं तो पता चलता है कि मशीन में नेटवर्क नहीं है। चार बार दौड़ने के बाद कहीं अंगूठा लग पा रहा है। राशन नहीं मिलने से समस्या हो रही है। जिला पूर्ति अधिकारी बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि नेटवर्क में कुछ दिक्कत की बात सामने आ रही है। सीमावर्ती क्षेत्र में कुछ दिक्कत है, लेकिन उपभोक्ताओं को राशन वितरण किया जा रहा है। जब नेटवर्क नहीं रहता है तो थोड़ी दिक्कत तो होती है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में अधिक समस्या
ई-पॉज मशीन से वितरण शुरू होने के बाद से ही भारत-नेपाल सीमा से सटे गांव के उपभोक्ताओं को काफी समस्या है। कारण, बॉर्डर पर किसी भी कंपनी का नेटवर्क काम नहीं करता। ऐसे में भारत-नेपाल सीमा से सटे 68 किलो मीटर के दायरे के 50 गांव के उपभोक्ताओं को राशन लेने में हर बार कठिनाई होती है।
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अंगूठा लगाने से भी परहेज
कोरोना के संक्रमण के कारण अब अधिकांश उपभोक्ता ई-पॉज मशीन से अंगूठा लगाने से भी कतरा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं अंगूठा लगाने से संक्रमित न हो जाएं। कई स्थानों पर तो मशीन सैनिटाइज करने के बाद भी लोग अंगूठा नहीं लगा रहे हैं।
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जिले में है 1341 कोटे की दुकान
जिले के 1199 ग्राम पंचायतों में 1341 कोटे की दुकान हैं। विभाग के मुताबिक जिले में अंत्योदय और पात्रगृहस्थी के लगभग 17 लाख लोगों को राशन मिलता है।
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