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Siddharthnagar News: सीएचसी में डिलीवरी से डिस्चार्ज तक रेट तय, दवा के पर्चे पर शैंपू भी

Thu, 21 Nov 2024 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सीएचसी शोहरतगढ़। 
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शोहरतगढ़। सीएचसी शोहरतगढ़ डिलीवरी से लेकर डिस्चार्ज तक रेट तय हैं, यही नहीं लेबर रूम से दवा के पर्चे पर शैंपू भी बिकवाया जा रहा है। मरीजों के अनुसार सभी प्रसूता महिलाओं को बेवजह शैंपू दिया जा रहा है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार सभी महिलाओं को शैंपू की आवश्यकता नहीं होती है। शोहरतगढ़ सीएचसी में आयोजित उपहार वितरण समारोह में विधायक विनय वर्मा व सीएमओ डाॅ. रजत कुमार चौरसिया के सामने आशा कार्यकर्ताओं ने वसूली की पोल खोल दी, तो स्वास्थ्य महकमा इसकी जांच के नाम पर कोरम पूर्ति करने में जुटा है।
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सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी निशुल्क होनी चाहिए, सीएचसी पर प्रसव कक्ष में प्रसव कराने आने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजनों से बिना रुपये लिए नार्मल और सीजर डिलीवरी नहीं हो रही है। नॉर्मल प्रसव कराने पर 2000 हजार से 3000 रुपये वसूले जा रहे हैं। वहीं सीजर केस में गर्भवती महिलाओं के परिजनों से 6000 हजार से 7000 हजार जामा कराने के बाद ही सीजर केस लिया जा रहा है, जो मरीज पैसा देने में आनाकानी करते हैं, उन्हें गंभीर बताकर सीजर करने मना कर देते हैं। ऐसे मरीज रेफर होने के बाद परेशान होते हैं। सिजेरियन डिलीवरी हो तो 2000 हजार रुपये की दवा और नार्मल डिलीवरी है तो 1000 से 1200 रुपये की दवा मंगाई जा रही है।


बाहर से मंगाई जाती हैं दवाएं, समझाने के बहाने कर्मचारी तोड़ देते हैं सील
केस नंबर एक

क्षेत्र के मटीयरिया निवासी शहीदा ने बताया कि सीएचसी 3 नवंबर को उनकी नार्मल डिलीवरी हुई थी। लेबर रूम में 2000 हजार रुपये महिलाकर्मी ने लिया 1000 हजार रुपये की दवाई बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगा ली गई। दवा आने के बाद सारी दवाइयों का सील तोड़ दिया गया। इस दवाइयों में 250 रुपये का शैंपू भी था, जिसका कोई उपयोग नहीं हुआ।
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केस नंबर दो

बड़गो निवासी महिमा ने बताता कि सितंबर में शोहरतगढ़ सीएचसी अस्पताल में प्रसव कराने गई थी। वहां जांच के बाद चिकित्सक ने कहा कि सीजर करना पड़ेगा। उसके बाद चिकित्सक ने कहा प्रामाणित करा लो। प्रमाणित होने के बाद सीजर करने में आनाकानी करने लगे। जब परिजन 6000 हजार रुपये जमा किया, तब चिकित्सक ने सिजेरियन डिलीवरी कराई। उसके बाद सारी दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर से मंगाई गई और महिला कर्मी ने सारी दवाओं की सील तोड़ दिया।


केस नंबर तीन

मुडिला बुजुर्ग निवासी आरती ने बताया कि अगस्त महीने शोहरतगढ़ सीएसची पर चिकित्सक ने मेरी सिजेरियन डिलीवरी कराई थी। सिजेरियन डिलीवरी के लिए पहले 6000 रुपये लिया गया, फिर बाहर से 2000 हजार रुपये की दवाई मंगाई गई। मेडिकल स्टोर का कर्मचारी अस्पताल में ही दवा पहुंचा देता है।

केस नंबर चार

ललिता शर्मा निवासी खुरहुरिया ने बताया कि 10 नवंबर को सीएसची में उनकी नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। लेबर रूम में महिला स्वास्थ्य कर्मी ने 1500 रुपये लिया था और 1000 रुपये की दवाई भी बाहर से मंगाई गई। जिसमें एक शैंपू भी दिया गया था जबकि इसका उपयोग नहीं था। उसे वापस करने लिए मेरे पति गए, लेकिन वापस नहीं हुआ। क्योंकि उसका सील तोड़ दिया गया था।



कोट
सीएचसी पर सभी दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन शैंपू के बारे में कोई जानकारी नहीं है। महिलाओं की डिलीवरी के मामले में रिश्वत लेने की जानकारी नहीं है। इसकी जांच की रही है, जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. सौरव चतुर्वेदी, अधीक्षक सीएचसी, शोहरतगढ़

कोट
डिलीवरी कराने वाली सभी महिलाओं को शैंपू की आवश्यकता नहीं होती है। कुछ महिलाओं में मर्ज के अनुसार शैंपू का सुझाव दिया जाता है।
-डॉ. अनीता द्विवेदी, स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ
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