ठंड बढने के साथ ही बूढ़ी राप्ती में अवैध बालू खनन का कारोबार पांव पसारने लगा है। राजस्व की लगातार क्षति होने के बाद भी विभाग अनजान बना हुआ है। रात के अंधेरे में तेजी से फल-फूल रहे अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने की कोई कवायद नहीं दिख रही।
क्षेत्र के सोनौली, मधवापुर, अशोगवा, रतनपुर, भैसहवां, बैलिहवा, कोडरवा घाट पर खनन माफिया अवैध बालू खनन का खेल ठंड के आगाज के साथ करते हैं और बरसात तक चलता है।
इन घाटों पर दिन के उजाले में साइकिल, डोलू, डल्लफ व रात में ट्रैक्टर ट्रॉली से लगातार खनन होता है। अवैध खनन न रुकने के पीछे लोग खनन माफियाओं की ऊंची पहुंच बता रहे हैं। इन दिनों रात के 12 बजे से भोर में 3 बजे तक यह अवैध धंधा चल रहा है।
रात के अंधेरे में खनन माफिया बांध के करीब बगीचों में भी बालू डंप करके रखते हैं और दिन में मौका देखकर ढुलाई करते हैं। फिलहाल मधवापुर घाट पर अवैैध खनन का काम जोरों पर चल रहा है। कोई रोक-टोक न देख अन्य घाटों तक भी खनन माफिया दायरा बढ़ा रहे हैं।
अवैध खनन का यह खेल बारिश होने तक लगातार चलता है। खनन के चलते बरसात के दिनो में नदी का कटान बढने की आशंका गहरा रही है। खनन माफियाओं का नेटवर्क पुलिस से भी तेज है। जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती है, उसके आने की सूचना खनन करने वालों तक आ चुकी होती है। यही वजह है कि इन खनन माफियाओं तक पुलिस व खनन विभाग के लोग कम ही पहुंच पा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो गुप्तचर का काम कुछ जिम्मेदार लोग भी मात्र कुछ रुपयों के लिए ही करते हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में एक ट्रॉली बालू 2500 से 3000 व एक डल्लफ की कीमत 400 से 500 के करीब बेची जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी में बालू की खुदाई इसी तरह होती रही तो बरसात के दिनों में नदी के किनारे के कई गांव राप्ती की चपेट में आ सकती है। इटवा एसडीएम जुबेर बेग ने बताया कि अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराएंगे। अगर अवैध खनन हो रहा है तो उस पर रोक लगाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।