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Siddharthnagar News: नेपाल में बारिश से जिले में तबाही, 11 नदियां-नाले बढ़ाते हैं लोगों का दर्द

Thu, 28 May 2026 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में होने वाली बारिश का पानी जिले के लोगों के लिए आफत से कम नहीं है। नेपाल से निकलकर आने वाली सभी 11 नदियां और नाले में उफान के बाद जिले में भारी तबाही मचती है।
वहीं, सुरक्षा के लिए बने बांध और नदी किनारे कटान रोकने के लिए कराए गए बचाव कार्य नाकाफी साबित होते हैं। ऐसे में जिले के लोगों को हर वर्ष आने वाली बाढ़ की त्रासदी से बचाव का कोई विकल्प नजर नहीं आता। हालांकि, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की तरफ से इस वर्ष भी बाढ़ से पूर्व बचाव कार्य के साथ ही राहत के इंतजाम किए जा रहे हैं। इस वर्ष 14 अति संवेदनशील कटान स्थलों पर 47 करोड़ रुपये खर्च कर बचाव कार्य कराए गए हैं।
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जिले में बहने वाली राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोघी, बानगंगा नदियों समेत जमुआर, घोरही, सोतवा आदि नाले नेपाल के पहाड़ों से निकलते है। नेपाल में बारिश का सिलसिला शुरू होते ही जिले की सभी नदियों का जलस्तर बढ़ने लगता है। उच्चस्तर पर पहुंचते ही त्रासदी में बदल जाता है। बाढ़ से बचाव के लिए इन नदियों किनारे 454 किमी लंबे 39 बांध बनाए गए हैं। वहीं, 50 से अधिक संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थलों पर बचाव व मरम्मत कार्य भी कराए जाते हैं। इसके बावजूद हर वर्ष बाढ़ से भयावह तबाही मचती है। हालांकि वर्ष 2025 में बाढ़ से सिर्फ दो गांव की आबादी और फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन इसमें तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई थी।
वहीं, 2024 में आई बाढ़ से जिले के पांचों तहसीलों के 350 से अधिक गांव की 3.17 लाख की आबादी प्रभावित हुई थी और 143 गांव डूब गए थे। साथ ही 51 हजार हेक्टेयर फसल डूबकर नष्ट हो गई थी और तीन लोगों की डूबने से मौत हुई थी। इसके पूर्व प्रत्येक वर्षों में भी ऐसी ही त्रासदी का सामना करना पड़ा था।
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अब एक बार फिर मानसून सिर पर है और विभागीय दावों में 14 अति संवेदनशील बांधों पर काम भी कराए जा चुके हैं। इसके बाद भी लोग बचाव इंतजामों के बीच सहमे हैं।
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