-चार दिन पहले खतरे के स्तर पर था जनपद का एक्यूआई स्तर, इमरजेंसी में पहुंच रहे थे 15 से 20 सांस के रोगी
-अब खुली हवा में ले सकेंगे आसानी से सांस, नहीं होगी दिक्कत
-धूल गुब्बार फसल की मड़ाई से बढ़ गया था प्रदूषण का स्तर पुराने रोगियों को हो रही थी सांस में दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सांस की तकलीफ और धूल गुबार से होने वाली एलर्जी के शिकार के लोगों के लिए राहतभरी खबर है। अब एक सप्ताह तक वह खुली हवा में सांस ले सकते हैं। यह इसलिए कि जनपद में हवा की गुणवत्ता में बारिश के बाद एकाएक व्यापक सुधार दर्ज किया गया है। खतरे के स्तर पर पहुंच चुके प्रदूषण का स्तर काफी नीचे आ गया है।
जानकार उम्मीद कर रहे हैं कि अगले एक सप्ताह तक हवा की गुणवत्ता बेहतर रहेगी। अगर फिर बारिश हो गई तो समय और बढ़ सकता है। क्योंकि एक सप्ताह पूर्व की तुलना में 50 अंकों की कमी है। जहां एक सप्ताह पहले एक्यूआई का आंकड़ा 97-100 के बीच में था। वह शनिवार सुबह 48 दर्ज किया गया, जो सेहत के लिए ठीक है। वहीं, बारिश से तपन में कमी देखी गई। जबकि, बारिश से सब्जी की खेती करने वाले किसानों को काफी लाभ होना बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इससे फूल और फल तेजी से लगेगा। साथ ही सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी।
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अप्रैल लगते ही बिगड़ गई थी हवा की सेहत
अप्रैल लगते ही गर्मी के साथ- साथ हवा की सेहत बिगड़ना शुरू हो गया था। इसके पीछे की वजह धूप से जमीन सख्त हुई तो धूल बनकर उड़ने लगा। साथ ही फसलों की कटाई और मड़ाई से धूल की परत जमने लगी। वहीं, निर्माण स्थलों से भी धूल उड़ने से एक लेयर सा बन गया था। 15 दिन पहले की बात करें तो जनपद में एक्यूआई का स्तर 140-150 के बीच में पहुंच गया था, जिसके बाद डॉक्टराें ने अस्थमा के शिकार राेगियों, बुजुर्ग और बच्चों को बिना मास्क लगाए बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहे थे। क्योंकि गर्मी और धूल गुब्बार से सांस में तकलीफ बढ़ रही थी। 10 अप्रैल के बाद कई बार हल्की बारिश से कुछ हद तक प्रदूषण कम था।
दो दिन पहले तक 97-100 के करीब एक्यूआई शहर दर्ज किया गया था। पर बृहस्पतिवार रात और शनिवार को जिले में हुर्ह बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली। आसमान छू रहे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार दर्ज किया गया। सुबह में एक्यूआई 48 दर्ज किया गया। जो काफी सुधार है और सुबह शाम निकलने वालों के लिए अनुकूल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एकाएक गिरावट होने से काफी राहत है। एक सप्ताह तक स्थिति नियंत्रण में रहेगी। क्योंकि बारिश में जहरीला धुंआ और धूल की परत मिट्टी में चली गई। इसलिए अब कुछ दिन तक हवा की गुणवत्ता सही रहेगी।
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सब्जी की फसल के लिए उपयोगी
बारिश से कुछ नुकसान तो कुछ फायदा भी हुआ है। नुकसान उन किसानों का हुआ है, जिनका गेहूं और पशुओं को खिलाने के लिए बाहर पड़ा भूसा भीग गया। खेत में डंठल पड़ा है, लेकिन भूसा नहीं बन सका। अब उन्हें गेहूं, भूसा दाेनों सुखाना पड़ेगा। तभी उसको रख पाएंगे। उनके लिए बारिश किसी संकट से कम नहीं है। वहीं, सब्जी की खेती करने वाले किसानों को लाभ हुआ है। जनपद में बड़े पैमाने में किसान गर्मी वाली सब्जी की खेती करते हैं। इसमें भिंडी, कोहडा, लौकी, बोडा, करेला, साग और मूली आदि लगाते हैं। हर साल तपन की वजह से जहां हर दिन पानी भरना पड़ता था। वहीं, फसल में उत्पादन कम होता था। बारिश के बाद नगर के सटे ढाबा में खेती करने वाले किसानों के पास पहुंचे तो वे खुश नजर आए। किसान विक्रम यादव, अवराम ने बताया कि पिछले साल अब तक लू चल रही था। गर्मी के कारण सुबह और शाम दोनों समय में खेत में पानी भरना पड़ता था। इसके बाद भी गर्म हवाओं के कारण फूल और फल नहीं लगता था, लेकिन इस बार सब्जी की खेती के लिए मौसम अनुकूल दिख रहा है। क्योंकि 10 अप्रैल तक अब तक तीन बार बारिश हुई। शनिवार सुबह ठीक बारिश हुई अब कुछ दिन फसल की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। मौसम बहुत ही अनुकूल है, अगर ऐसा ही रहा तो इस बार लाभ होगा।
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बोले विशेषज्ञ
प्रदूषण हर व्यक्ति को किसी ने किसी माध्यम से नुकसान पहुंचाता है। खास करके गर्मी में धूल और गुबार फेफड़े को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए तापमान बढ़ने के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिसका असर पुराने सांस के रोगियों और बच्चों में अधिक देखा जाता है। उन्हें सांस में दिक्कत, खांसी सहित कई परेशानी होती है। हवा में फैले प्रदूषण को कम करने में बारिश अहम है। क्याेंकि तेज बारिश में सब जमीन में चला जाता है। बारिश से हवा की सेहत में सुधार हुआ है, जो बहुत ही अच्छा है। इससे सांस के रोगिया को काफी हद तक राहत मिलेगी। फिर भी एहतियात बरतना न छोड़ें।
-डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
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बोले मौसम विशेषज्ञ
अभी रविवार को गरज चमक के साथ बारिश और आंधी आने का अनुमान है। बारिश का दौर खत्म होने के बाद तापमान में वृद्धि होगी, जिससे गर्मी बढ़ूेगी।
-डॉ. अतुल कुमार सिंह, मौसम वैज्ञानिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ