नेपाल सरकार के विरोध में प्रदर्शन्ा करते मधेस मोर्चा के कार्यकर्ता।
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संयुक्त लोकतांत्रिक मधेस मोर्चा के बंद का व्यापक असर मधेसी जिलों में देखा गया। जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकालकर नेपाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। जनकपुर में मधेसी मोर्चा और एमाले कार्यकर्ताओं में तीखी झड़प के कारण तनाव की स्थिति रही, वहीं कपिलवस्तु का मुख्य नाका कृष्णानगर भंसार पूरे दिन ठप रहा। भारतीय वाहनों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए नेपाल में दाखिला नहीं मिला। कई जिलों की सड़कें सूनी रहीं और लोग सवारी साधनों के लिए परेशान रहे।
बिना संविधान संसोधन के नेपाल में निकाय चुनाव संपन्न कराने को तैयार प्रधानमंत्री के खिलाफ मधेसी मोर्चा ने बुधवार को 22 जिलों में उग्र प्रदर्शन किया। विभिन्न चौक-चौराहों पर मशाल जुलूस निकालकर लोगों से आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया गया। आंदोलन के कारण जहां सड़कों पर आवागमन ठप रहा, वहीं स्कूल, कॉलेज और कल कारखाने, दुकानें बंद रहीं। सवारी साधन न मिलने से बहादुरगंज आंख अस्पताल में इलाज को आए भारतीय मरीजों को काफी परेशानी हुई। मरीजों को पैदल ही भारतीय सीमा तक सफर तय करना पड़ा। मधेस आंदोलन को देखते हुए जगह-जगह प्रहरी मुस्तैद रहे। कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं से झड़प की भी सूचना है।
मुख्य बाजार के अलावा तौलिहवा, पकड़ी, मर्यादपुर, महराजगंज, बहादुरगंज, कृष्णानगर, चंद्रौटा, जीतपुर, नवलपरासी, रूपनदेही, गेरमा, भुजहवां में बंद का व्यापक असर रहा। रौतहट जिले में मधेसी मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जिला निर्वाचन कार्यालय में ताला जड़ते हुए प्रदर्शन किया। मधेस गठबंधन के सह संयोजक कैलाश महतो ने बताया कि सरकार ने हमारे अधिकारों का हनन कर अवैधानिक रूप से चुनाव की घोषणा की है, यह कत्तई मान्य नहीं है। आंदोलन और तेज किया जाएगा और तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार चुनाव का निर्णय वापस नहीं ले लेती।