- मौसम के बदलाव का लोगों पर दिखने लगा सीधा असर, हर उम्र के लोग पड़ रहे बीमार
- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में बढ़ी मरीजों की संख्या
सिद्धार्थनगर। अगर बुखार है और खुद दवा कर रहे हैं तो यह अनदेखी और लापरवाही भारी पड़ सकती है। मौसम के बदलाव के बीच एकाएक चढ़ रहा बुखार टाइफाइड का रूप ले ले रहा है। मरीज के ब्लड की जांच के बाद इसकी पुष्टि हो पा रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में इस प्रकार के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। 30 मरीज बुखार, जुकाम, बदन और सिरदर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जिनमें पांच से सात में जांच के बाद टाइफाइड की पुष्टि हो रही है।
जिला अस्पताल से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद सुविधाओं में इजाफा होने के साथ ही मरीजों की संख्या में बेहतहाशा वृद्धि हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टर के तैनात होने के साथ जांच की सुविधाएं बढ़ी है। यहां सामान्य दिनों में 1000-1300 ओपीडी रहती है जबकि मौसम में उतरा-चढ़ाव और सीजन बदलने की साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। मौजूदा समय में ऐसे ही मामले देखने को मिल रहे हैं। सोमवार को नए और पुराने दोनों भवन में ओपीडी और पर्चा काउंटर पर मरीजों की भीड़ देखी गई। ओपीडी में मरीजों की तादाद बढ़ने के पीछे जानकारी ली गई तो मौसम से जुड़ी बीमारी से पीड़ित मरीज अधिक रहे।
चिकित्सकों का कहना है कि बुखार के बढ़ते मामलों की वजह से ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब और निजी जांच केंद्रों में कराई जा रही खून की जांच में टाइफाइड के मामले सामने आ रहे हैं। फिजिशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतार थी। इसमें अधिकांश मरीजों में बुखार, दर्द और भूख न लगने जैसी शिकायतें देखने को मिली। इसमें कुछ मरीजों की रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि बुखार देखते ही देखते रूप बदल दे रहा है। मरीजों को समस्या रहती है लेकिन अनदेखी करने से समस्या बढ़ जाती है।
सामान्य समझकर दवा लेना खतरनाक
चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण देखने के बाद जब जांच कराई जा रही है तो टाइफाइड के मामले सामने आ रहे हैं। कई मरीज शुरुआत में सामान्य बुखार मानकर घरेलू उपचार या मेडिकल स्टोर से दवा लेते रहे, जिससे संक्रमण बढ़ने के बाद उन्हें अस्पताल का रुख करना पड़ा। बुखार के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। इनमें युवाओं के साथ बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। इसी प्रकार स्किन रोग विशेषज्ञ के पास दाद, खुजली और चकत्ता पड़ने की शिकायत के मरीज पहुंच रहे हैं।
फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि टाइफाइड एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसका समय रहते उपचार जरूरी है। यदि बुखार तीन से पांच दिन से अधिक बना रहे तो तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से बीमारी जटिल हो सकती है और उपचार में अधिक समय लग सकता है।
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बीमारी से बचाव की सलाह
इसके साथ ही उबला या शुद्ध पानी पीने, ताजा भोजन करने, खुले में बिक रहे कटे फल और खाद्य पदार्थों से बचने और हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सावधानी और समय पर जांच से टाइफाइड जैसी बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।