स्वास्थ्य मंत्री के जिले में अस्पताल में जरूरी दवाएं नहीं
अस्पताल में दवाओं की कमी, बाहर से दवा खरीद रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य मंत्री का जिला और सात बार दवा के लिए की गई लिखा-पढ़ी, मरीजों को दवा नहीं दिला पा रही हैं। यह हाल जिला अस्पताल का है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, लेकिन दवा के नाम पर उन्हें बाहर की ओर रुख करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि खासी और खुजली तक की दवाएं नहीं उपलब्ध हैं। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि गंभीर बीमारी के लिए उपयोग होने वाली दवाओं का हाल क्या होगा। जबकि स्वास्थ्य मंत्री कई बार समीक्षा कर दवा उपलब्ध कराने की बात कह चुके हैं।
168 बेड वाले जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो ठंड में सर्दी-जुकाम, निमोनिया जैसी संक्रामक बीमारियां बढ़ी हैं। लेकिन इन मर्ज की दवाएं जिला अस्पताल में नहीं हैं। मौसमी बीमारियों की दवाओं का टोटा है। इलाज के लिए आने वाले मरीज डॉक्टर को तो दिखा ले रहे हैं, लेकिन उन्हें जरूरी दवाएं मिल नहीं पा रही हैं। इसके लिए गरीब मरीजों को रुपये खर्च करने पड़ रहे है। इलाज के लिए परसा से आई शांति देवी ने बताया कि बेटे को कोल्ड डायरिया है। दवा लिखी गई थी, लेकिन जब काउंटर पर गई तो बताया गया कि दवा नहीं है। मजबूरन बाहर से लेना पड़ा। चिल्हिया से आई नसीबा ने बताया कि बेटा कई दिनों से बीमार है। डॉक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं, लेकिन अस्पताल में नहीं मिलीं। मजबूरी में बाहर से दवा लेनी पड़ रही। यह कहानी केवल दो मरीजों की नहीं है। सैकड़ों मरीज इस दर्द से पीड़ित हैं। लेकिन वह मजबूर है करें तो क्या करें। सीएमएस डॉ. रोचिष्मति पांडेय ने बताया कि दवाओं के लिए पत्राचार किया गया है। डिमांड की जा रही है, जो दवाएं मौजूद हैं, उन्हें मरीजों में वितरण किया जा रहा है।
ये दवाएं नहीं है उपलब्ध
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां प्रतिदिन 1500 नए मरीजों का पंजीकरण होता है, जो अस्पताल में अपनी बीमारी दिखाने और दवा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, 1000 हजार पर्चा पुराना भी पहुंचता है। मगर अस्पताल में दवा वितरण कक्ष में हर पांच मरीज में से केवल दो-तीन मरीजों को ही दवाएं मिल पा रही हैं। जरूरी दवाओं में एंटीबायोटिक दावा में मोक्सी, इंथ्रोमेडीसिन सहित अन्य दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा खासी की सिरप एक्सपोक्टेरेंट, कैल्शियम व डॉक्सी, डाइक्लो, नाम की दवाएं नहीं है।
मंत्री के सामने उठ चुका है मुद्दा
स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के सामने कई बार दवाओं की कमी का मुद्दा उठ चुका है। खुद समीक्षा बैठक में जिम्मेदार इसे लेकर पत्राचार की बात भी कह मंत्री से कह चुके हैं। इसके बाद भी दवाएं जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। यह हाल जिला अस्पताल का है। जबकि सीएचसी और पीएचसी की स्थिति और गंभीर है। लेकिन इस पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ रही है।