उसका बाजार। क्षेत्र में मंगलवार को एक सामाजिक संस्था की ओर से पंचायत वार्ड सदस्यों के लिए जलवायु परिवर्तन पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बदलते मौसम के प्रभाव और उसके अनुसार ग्राम स्तर पर योजनाएं तैयार करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
संस्था के सचिव श्रीधर पांडेय ने ग्राम पंचायत विकास कार्ययोजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम, संसाधन और परिस्थितियों को प्राथमिकता देना जरूरी है। कार्यशाला में विशेषज्ञ सुधीर कुमार ने जलवायु परिवर्तन के खेती पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि बदलते मौसम के कारण बारिश का समय और मात्रा अनिश्चित हो रही है, जिससे सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियां बढ़ रही हैं। इसके चलते फसल चक्र प्रभावित हो रहा है और उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी से गेहूं जैसी रबी फसलों की उपज घट सकती है। वहीं, कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है। सिंचाई की मांग बढ़ने के साथ भूजल स्तर गिरने की समस्या गंभीर होती जा रही है। वर्षा के पैटर्न में बदलाव के कारण खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि चावल और मक्का जैसी फसलों की उत्पादकता क्षेत्र के अनुसार घट-बढ़ सकती है और नए रोग जनकों के फैलने की आशंका भी बढ़ रही है।
कार्यशाला में उमेश, ममता, अनीता, सुधा, सुधा चौहान सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक रहकर स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई।