सिद्धार्थनगर। पिछले तीन दिन से जारी बारिश ने जनपद की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिले में आठ फीडर पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। मुख्य लाइनों पर जगह-जगह पेड़ गिरने और बिजली के पोल टूट जाने के कारण आपूर्ति बाधित हुई है।
आठ फीडर पर 350 से अधिक बिजली के पोल टूटे होने का अनुमान है। लगभग 800 गांव में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने के आसार हैं। बांसी क्षेत्र के खैरटिया, मरवटिया, पथरा, खुनियांव और रीवा फीडर प्रभावित हुए हैं।
सिद्धार्थनगर के ढेबरुआ, बोहली और बढ़नी फीडर से भी बिजली ठप है। कुछ स्थानों पर पिछले 24 और 36 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित है। विद्युतकर्मी बिजली व्यवस्था बहाल करने में जुटे हैं। हालांकि, भारी बारिश के चलते खोदाई और नए पोल लगाने में दिक्कत आ रही है। जिम्मेदारों के मुताबिक, देर रात तक कुछ फीडर पर बिजली व्यवस्था बहाल होने का अनुमान है।
उपभोक्ताओं को परेशानी : बिजली प्रभावित होने से 800 से अधिक गांवों के लाखों उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद पड़ गए हैं और बिजली न होने के कारण इन्वर्टर भी जवाब दे गए हैं। बारिश के बीच अंधेरे से मुश्किल और बढ़ गई है। मोबाइल चार्ज न होने के कारण लोगों का संपर्क टूट जा रहा है।
बिजली आपूर्ति बहाली में चुनौतियां : अधीक्षण अभियंता विद्युत निगम लाल सिंह ने बताया कि अधिक बारिश से कई बिजली के पोल टूट गए हैं। विभागीय कर्मी कार्य में लगे हुए हैं, पर बारिश के कारण कार्य में परेशानी हो रही है। जहां रोड पर पेड़ गिरे हैं और तार टूटे हैं, वहां तार तो किसी प्रकार से जोड़े जा रहे हैं लेकिन जहां नया बिजली का पोल लगाना है, वहां समस्या आ रही है। बिजली बहाली में अभी वक्त लगेगा। बारिश थमने के बाद ही कार्य में गति आएगी।
बिजली आपूर्ति बाधित : जिले के विभिन्न हिस्सों में 48 से 72 घंटे तक बिजली गुल रही। बिस्कोहर, सोहना और जिगना फीडर क्षेत्रों में करीब 40 बिजली पोल और सैकड़ों पेड़ गिरे। कनिष्ठ अभियंता सिद्धार्थ शंकर गुप्ता ने तेज हवा के कारण मरम्मत में दिक्कत बताई। डुमरियागंज तहसील के करीब 400 गांवों की आपूर्ति प्रभावित हुई, अधिशासी अभियंता संतोष कुमार त्रिपाठी ने बहाली के प्रयास बताए। पथरा, खैरटिया और पटखौली फीडर से जुड़े सैकड़ों गांवों में भी बिजली संकट रहा। कनिष्ठ अभियंता अमरनाथ रैवनियार और अवनीश मिश्र ने कर्मचारियों के मरम्मत में जुटने की जानकारी दी। इटवा कस्बे सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे से बिजली ठप है। बढ़नी नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आपूर्ति बाधित रही।
मार्गों पर आवागमन प्रभावित : तेज हवा और बारिश से कई मुख्य मार्गों पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। बिस्कोहर-इटवा मार्ग, बभनी-सोहना मार्ग और इटवा-डुमरियागंज मार्ग पर चौखड़ा-बदलिया के बीच पेड़ गिरे। रगड़गंज, करहिया और बलुआ-खुखुड़ी मार्ग पर भी आवागमन बाधित रहा।
ढेबरुआ-इटवा और बढ़नी-शोहरतगढ़ एनएच-730 पर भी कई स्थानों पर पेड़ गिरे। चिल्हिया-गौरा मार्ग पर पेड़ गिरने से एक घंटे तक यातायात बाधित हुआ। वन विभाग और पुलिस टीमों ने पेड़ हटवाकर यातायात बहाल किया।
नदियों का जलस्तर बढ़ा और फसलें क्षतिग्रस्त : लगातार बारिश से क्षेत्र की नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बूढ़ी राप्ती का पानी तौलिहवा और मटियार उर्फ भुतहवा में खेतों में फैल गया। खैरी शीतल प्रसाद ग्राम पंचायत के नकोलडीह टोले की सड़क पर करीब तीन फुट पानी भरने से आवागमन बंद हो गया।
बानगंगा, बूढ़ी राप्ती और घोरही नदी तथा सोतवा व सुरहिया नाले का जलस्तर भी बढ़ा है। बांसी में राप्ती नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, जो चेतावनी स्तर से करीब एक मीटर नीचे था। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने राप्ती नदी तट का निरीक्षण कर बांध की निगरानी के निर्देश दिए। तेज हवा और पानी भरने से धान, गन्ना और केले की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों ने फसल क्षति का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।