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कोरोना संक्रमितों का हौसला बढ़ाएगी पुलिस

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कोरोना संक्रमितों का हौसला बढ़ाएगी पुलिस
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फोन के जरिए पुलिस पूछेगी कुशलक्षेम
दवा मिली या नहीं, क्या है समस्या जानेंगे हाल
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को देगी जरूरी जानकारी
1500 से अधिक हैं होम आइसोलेट मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमित मरीजों का अब पुलिस हौसला बढ़ाकर उन्हें स्वास्थ्य होने का तरीका बताएंगी। साथ ही उनसे संपर्क करके उनकी समस्याओं को सुनेगी और उसका निस्तारण करेगी। थाने स्तर से होने वाला मदद खुद मरीजों तक पहुंचाएगी। यह कार्य बीट पुलिसकर्मी के जिम्मे हैं। जो अपने क्षेत्र के संक्रमित होकर होम आइसोलेट में रहकर इलाज करा रहे मरीजों की फोन से कुशलक्षेम जानेंगे।
कोरोना संक्रमण से हर कोई परेशान है, रोजगार छीनने से लेकर आर्थिक संकट मुंह खोले खड़ा है। ऐसे में संक्रमित होने वाले परिवार के समक्ष कई प्रकार की समस्याएं हैं। वहीं बढ़ते हुए संक्रमण के कारण अधिकांश लोगों को तक सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वहीं कई परिवारों के समक्ष भोजन और दवा की भी समस्या है। क्योंकि कोरोना संक्रमित होने के बाद होम आइसोलेट हो गए हैं। ऐसे में वह कहीं बाहर नहीं जा पा रहे हैं। मगर उनकी जरूरतों को अब पुलिस पूरा करेगी। साथ ही उनकी समस्या को जिम्मेदारों तक पहुंचाएगी। बीट स्तर पर पुलिस टीम को यह जिम्मा सौंपा गया है। वह कोरोना सेल से मिले होम आइसोलेट अपने क्षेत्र के मरीजों से फोन के जरिए संपर्क करेंगे। उनका हालचाल लेंगे। साथ ही उनकी समस्याओं को जानकर जिम्मेदारों को बताएंगे। पुलिस के इस कार्य से मरीजों को सहूलियत मिलेगी। एएसपी सुरेशचंद रावत ने बताया कि बीट पुलिस को कोरोना संक्रमित मरीजों से फोन से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है। वह इस कार्य में लगे हुए हैं। बताई गई समस्याओं को कोरोना सेल को बताया जाएगा और साथ ही मदद पहुंचाई जाएगी।
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पुलिस का नेटवर्क है मजबूत
अन्य सरकारी विभागों के तुलना में पुलिस का नेटवर्क बहुत मजबूत माना जाता है। ऐसे में अगर पुलिस गांव स्तर पर काम मरीजों से संपर्क करेगी तो कोई अछूता नहीं रहेगा। साथ ही बीट सिपाही को गांव की ही हर गतिविधि के बारे में जानकारी होती है। ऐसे में दूसरे के माध्यम से भी वह मरीजों के दिक्कत को समझ सकेगा और उसकी मदद हो सकेगी।
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डेढ़ हजार के करीब होम आइसोलेट
जिले में लगभग डेढ़ हजार कोरोना संक्रमित मरीज होम आइसोलेट हैं। जिले में 18 थाने और कई पुलिस चौकियां है। हर गांव में लगभग पुलिस की पैठ है। ऐसे में पुलिस लोकल स्तर पर जब काम करेगी तो मरीजों को क्या सुविधा मिल रही है। इसके बारे में उसे सही जानकारी मिलेगी और उसका निदान हो सकेगा।
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