संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मौसम में नरमी और घने कोहरे के साथ- साथ घरों और कस्बों में जलने वाले अलाव व निर्माण स्थल से उड़ने वाली धूल हवा में जहर घोल रही है। हालात यह हैं कि दृश्यता दो मीटर तक पहुंच गई है। क्योंकि, एक्यूआई का स्तर 150 पहुंच गया है, जो एक व्यक्ति के दो सिगरेट का कश लेने के बराबर है। जो सेहत के लिए बहुत ही घातक है।
खास कर सांस के रोगियों के लिए यह और मुश्किल खड़ा कर सकता है। ऐसा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 100 से अधिक एक्यूआई का पहुंचना बच्चों-बुजुर्गों और सांस के रोगियों के लिए खतरनाक माना जाता है। ऐसे में मौसम के साफ होने तक मास्क लगाकर ही निकलें। क्योंकि लगातार ऐसे स्थानों पर आने- जाने से फेफड़े में संक्रमण फैल सकता है। दृश्यता की बात करें तो मंगलवार देर शाम और बुधवार सुबह एक मीटर दर्ज की गई।
मौसम में नरमी आने के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। कारण हवा में नमी के कारण धूल के कण की परत बन जाती है। जो सांस लेने के साथ ही फेफड़े में चली जाती है, जिससे सांस में तकलीफ के साथ ही जलन होने लगती है। कई बार नाक में खुजली और खांसी आने लगती है। कई दिनों से घना कोहरा और धुंध के कारण हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। बुधवार सुबह एक्यूआई 150 दर्ज किया गया।
वहीं, दृश्यता की बात करें तो मंगलवार शाम और बुधवार सुबह धुंध और कोहरे की चादर जैसा हो गया। हालात यह थे कि एक मीटर तक दिखाई नहीं पड़ रहा था। बाइक साइकिल और पैदल चलने वालों को सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई। सुबह में सैर करने वाले कम दिखे। बात मेडिकल कॉलेज की करें तो ओपीडी, इमरजेंसी में सांस के रोगी पहुंचे रहे हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक यह प्रदूषण और मौसम का असर है। इसमें पुराने के साथ- साथ नए रोगी भी पहुंच रहे हैं। साथ ही मास्क लगाने और बहुत कम निकलने की सलाह दे रहे हैं।