संवाद न्यूज एजेंसी शोहरतगढ़/ ढेबरुआ। नेपाल बॉर्डर पर स्थित बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं मरीजों को नहीं मिल पा रही है। कई रोग के विशेषज्ञ नहीं होने पर मरीजों को जिला मुख्यालय व निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए जाना पड़ रहा है। इससे लोगों के जेब पर अधिक बोझ पड़ रहा है। पीएचसी दो चिकित्सक के भरोसे चल रहा है।
सीमावर्ती इलाके के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। अस्पताल में डॉक्टर और सुविधाएं बढ़ाई जाए तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की संख्या प्रतिदिन 300 से 400 मरीज ओपीडी के लिए पहुंचते हैं। सबसे खास बात यह कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेपाल सीमा से सटे बढ़नी बाॅर्डर पर स्थित होने के नाते नेपाल राष्ट्र से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां पर सुविधाओं की कमी के साथ ही डॉक्टरों की कमी लोगों को खल रही है। कई रोगों के विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई है। इससे यहां के लोगों को बच्चों के उपचार के लिए 50 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर मुख्यालय पर स्थित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज आना पड़ता है। निजी अस्पताल में जाने पर उनकी जेब पर अधिक बोझ पड़ जाता है।
क्षेत्र अजय, राधेश्याम यादव, बाबूलाल, रामसागर, मयंक, आयुष, गुलाब, साधू और जगदीश ने कहा कि पीएचसी में पैथालॉजी की सुविधा है लेकिन एक्सरे व अल्ट्रासाउंड सहित आदि जांच की सुविधा नहीं है।
बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एमडी मेडीसिन, डेंटल चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित अन्य रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं है। कई बार स्वास्थ्य केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन चिकित्सक सहित अन्य चिकित्सक की तैनाती की मांग की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मरीज की हालत थोड़ी भी खराब रहती है तो चिकित्सक जिला मुख्यालय माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल रेफर कर देते हैं। जिला मुख्यालय दूर होने की वजह से निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है।ं