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मरीज माफिया : गठजोड़ में सेट न होने वाले डॉक्टर कर्मचारी बना दिए जाते हैं विवादित

Thu, 11 Jan 2024 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज मरीज माफियाओं ने बना लिया है गठजोड़
एंबुलेंस कर्मी पर हुई कार्रवाई तो खुली डॉक्टर और मरीज माफिया के बीच की गठजोड़
जूनियर रेजीडेंट का ऑडियो वायरल होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं से जो डॉक्टर और कर्मचारी सेट नहीं हुए उन्हें विवादित होते देर नहीं लगती है। दलालों को बाहर का रास्ता दिखाने वाले चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी विवादों से घिरकर कार्रवाई की जद में भी आ चुके हैं। सिस्टम में घुस चुके मरीज माफियों से जिनकी तगड़ी गठजोड़ है, वे बिना विवादित हुए काली कमाई कर रहे हैं। इसमें कुछ स्वास्थ्य महकमे के भी कर्मी शामिल हैं। इमरजेंसी से मरीज उठाने वाले एंबुलेंस कर्मी पर कार्रवाई हुई तो रात के अंधेरे में मरीज का सौदा करने वाले जूनियर रेजिडेंट की करतूत उजागर हुई, जिसमें वह स्पष्ट बात कर रहा है कि जिस मरीज को भेजे थे, उस पर मेरा नाम लिखवा देना। दलाल के बीच हुई इस बातचीत का ऑडियो भी वायरल हुआ, लेकिन ऐसे मामले में जांच नहीं होने से कार्रवाई तक बात नहीं पहुंची। इसी गठजोड़ के बीच यहां तक विवाद हुआ और इमरजेंसी के स्टाफ पिट गए।

मेडिकल कॉलेज ओपीडी से इमरजेंसी तक दलाल पैठ बना चुके हैं। इसमें कुछ सिस्टम का हिस्सा भी बन चुके हैं, जो किसी न किसी माध्यम से तैनात होकर मरीजों का सौदा कर रहे हैं। इनके साथ ही दवा और जांच कराने वाले दलाल भी पांव जमा चुके हैं। जिसको लेकर आए दिन मेडिकल कॉलेज में विवाद होता रहता है। सोमवार रात में हुए विवाद में भी कुछ ऐसी ही बात सामने आ रही हैं। जिसमें परदे के पीछे से एक-दूसरे पर आरोप लगा हैं।
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रोका तो कार्रवाई के हुए शिकार

पूर्व में तैनात रहे बालरोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार पर दवा और जांच लिखने को लेकर अकसर एक ग्रुप भिड़ा रहा। वार्ड और इमरजेंसी में उनसे विवाद कराया गया। अन्य लोगों की तरह से सिस्टम में सेट न होने का नतीजा रहा कि उन्हें बाहर का रास्ता देखना पड़ा।



फार्मासिस्ट पर हुई कार्रवाई

लगभग दो वर्ष पहले एक फार्मासिस्ट इसलिए विवादों से घिर गए कि वह अपनी ड्यूटी में बाहरी लोगों को नहीं घुसने देते थे। दो माह किसी तरह से उनकी ड्यूटी चली। इसी बीच एक मरीज के इलाज को लेकर विवाद करवा दिया। जांच के बाद उन्हें जिला अस्पताल से हटाकर सीएमओ के अधीन एक कार्यालय में भेज दिया गया।



डॉक्टर और दलाल की बात खुलकर आई बाहर

पांच माह पहले एक डॉक्टर के खिलाफ मरीज इसलिए लामबंद हो गए कि वह बाहरी व्यक्ति को बुलवाकर ब्लड की जांच करवा रहा था। इसके एवज में वह कमीशन ले रहा था। मरीजों के हंगामे के बाद उसने रुपये लौटने की बात कहीं, लेकिन इस मामले में कार्रवाई की जद में दूसरे चिकित्सक आ गए, जिनका दलाल और इस मामले से कोई नाता नहीं था।



आपसे में लड़े एंबुलेंसकर्मी, हुआ चालान

इमरजेंसी से मरीज उठाने वाले निजी एंबुलेंस कर्मियों में आपसी विवाद हुआ। इसके बाद तकरार बढ़ गई। 15 दिन पहले प्राचार्य की शिकायत पर इमरजेंसी के पास खड़ी दो एंबुलेंस को पुलिस थाने लेकर चली गई। उसका चालान भी कर दिया गया। इसके बाद दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

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मरीज के आगे हमारा नाम लिखवाना देना

दलालों में रार बढ़ी तो मेडिकल कॉलेज में मरीजों के बेचने का खेल उजागर होना लगा। एक बातचीत में शहर के एक अस्पताल का नाम लिया जा रहा है। इसमें सामने वाला कह रहा है कि मरीज के आगे किसका नाम दिए हो, हमारा मरीज बता देना। बात करने वालों कोई और नहीं बल्कि मेडिकल कॉलेज में तैनात एक जूनियर रेजीडेंट बताया जा रहा है, जो रात मेें ड्यूटी करता है। लेकिन इस मामले की न तो जांच हुई और न ही कार्रवाई की गई।

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निजी अस्पताल को भेजने वाली महिलाकर्मी पर नहीं हुई कार्रवाई

नवंबर में विकास भवन के सामने अवैध रूप से संचालित होने वाले लाइफ केयर अस्पताल में नवजात और प्रसूता की मौत हो गई थी। इसमें मेडिकल कॉलेज की एक महिला स्वास्थ्यकर्मी की ओर से वहां भेजे जाने की बात सामने आई थी। लेकिन इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर जांच हुआ होता तो चेहरा सामने आता।

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जिसे बचाने चले उसी ने पिटवा दिया

मेडिकल कॉलेज में सोमवार रात जो हुआ, वह सुनकर दंग रह जाएंगे। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि जिस मरीज के तीमारदार राजन पांडेय से विवाद हुआ था, उसकी गलती नहीं थी। मरीज का शुगर बढ़ा था और गैस का इंजेक्शन दिया जा रहा था। इसी बात को लेकर कहासुनी हुई। उसने मरीज को देखे बिना इलाज पर एतराज किया तो गाॅर्ड के जरिए बाहर करवा दिया गया। इसी बीच बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचने लगे तो लगा कि तीमारदार ने बुला लिया। हमले के डर से डॉक्टर को अंदर ले जाने लगे। इसी बीच भीड़ पहुंची और डॉक्टर ने गाली देते हुए पीटने के लिए कहा कि वह लोग हम पर टूट पड़े। डॉक्टर को बचाने के चक्कर में कई लोग पिट गए। किसी तरह से जान बच सकी।

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इमरजेंसी में चाहते हैं ड्यूटी
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी ड्यूटी चाहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या अधिक है, क्योंकि वहां से मरीजों का सौंदा करना आसान हो जाता है। यहीं कारण है कि निजी अस्पताल और डॉक्टरों से सांठगांठ करने वाले विवादित कर्मचारियों को चिह्नित नहीं किया गया है। जो मामले सामने आए हैं, उनकी जांच की जाती है तो कुछ डॉक्टरों का नेटवर्क भी सामने आ जाता। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मियों की संख्या 278 है, जबकि सीनियर रेजीडेंट 35 और जूनियर रेजीडेंट 44 है। मेडिकल छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 300 है।
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मेडिकल कॉलेज में हुए विवाद में जांच की जा रही है। जो भी व्यक्ति दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पता चला कि दोनों पक्ष आपस में समझौता करने वाले हैं, वे आपस में सहमत हो जाएंगे तो दोनों पक्ष को समझा दिया जाएगा। परिसर में खड़ी होने पर दो निजी एंबुलेंस का चालान कराया गया था। डॉक्टर से विवाद करने वाले एक कर्मचारी पर कार्रवाई पर भी कार्रवाई की गई थी। दलालों पर पैनी नजर हैं, जो भी पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जाएगी।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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