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Siddharthnagar News: मरीज माफिया के गठजोड़ का नहीं निकल रहा तोड़

Sat, 04 Nov 2023 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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पकड़ में आने के बाद कार्रवाई से पीछे हट जाते हैं जिम्मेदार
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मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएमओ कार्यालय तक हावी हैं मरीज माफिया

मामला सामने आने में कर दी जाती है लीपापोती, भागदौड़ का हवाला देकर पीछे हट जाते हैं जिम्मेदार

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने के दावे के बीच दीमक की तरह से घुसे मरीज माफिया महकमे को खोखला करने के साथ ही आर्थिक शोषण कर मरीजों को कमजोर कर दे रहे हैं। इनके गठजोड़ का तोड़ प्रशासन नहीं ढूंढ पा रहा है। पकड़ में आने के बाद या तो जांच में लीपापोती हो जाती है या फिर जिम्मेदार भागदौड़ से बचने की बात करते हुए कार्रवाई करने से पीछे हट जाते हैं। नतीजतन, मरीज माफिया सिस्टम में घुसकर मरीजों को निजी अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
मरीज माफिया कहीं खून बेचने का कार्य कर रहे हैं तो कहीं मरीज को बेचने का। छह दिन पूर्व सिस्टम की लाचारी से प्रसूता और नवजात की जान चली गई। इसमें भी मरीज माफिया की सहभगिता उजागर हो चुकी है। एक आशा वर्कर और स्वास्थ्यकर्मी का नाम सामने आ रहा है। अब तक इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई।
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इससे पहले सीएमओ और डिप्टी सीएमओ और निजी अस्पताल संचालक के लेनदेन का वीडियो वायरल होने के मामले में केस दर्ज होने के बाद भी आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं, कुछ मामलों में तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन और सीएमओ कार्यालय से की गई लापरवाही से मरीजों का शोषण करने वाले मरीज माफिया बच निकले। कारण यह कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई आगे नहीं आया।



रुपये लेते हुए वीडियो हुआ था वायरल, कार्रवाई का पता नहीं

लगभग तीन माह पहले इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मरीज से रुपये लेते हुए स्वास्थ्यकर्मी का वीडियो वायरल हुआ था। मामला जिम्मेदारों तक पहुंचा, जांच की बात कही गई। लेकिन तीन माह बाद भी स्वास्थ्यकर्मी उसी स्थान पर जमा हुआ है। कार्रवाई क्या हुई, यह जानकारी बाहर नहीं आई।



खून माफिया पकड़ा गया, कार्रवाई से पीछे हटे जिम्मेदार

पिछले माह ही एक निजी अस्पताल की ओर से सेट किया गया खून माफिया ब्लड बैंक पहुंचा। पूछताछ में वह पकड़ा गया। 15 हजार रुपये में एक यूनिट ब्लड बेचने की बात सामने आई थी। लेकिन कार्रवाई की बात आई तो भागदौड़ से बचने के लिए केस दर्ज नहीं कराया गया है। वह आसानी से निकल गया।



कई बार पकड़े गए दवा माफिया, माफीनामा पर छोड़ा
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कई बार प्राचार्य और सीएमएस की ओर से दवा के दलालों को पकड़ा गया। थाने तक सूचना दी गई। जब केस दर्ज कराने की बात सामने आई तो पीछे हट गए। मजबूर होकर पुलिस विभाग को उन्हें माफीनामा पर छोड़ना पड़ा।

फ्री ब्लड के रुपये ले ले रहे हैं मरीज माफिया

अस्पताल में एक अलग प्रकार का गिरोह का काम कर रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों के मुताबिक, जेएसवाई, कैंसर, थैलेसिमिया, एचआईवी सहित कुछ अन्य गंभीर बीमारी में ब्लड निशुल्क देने का नियम है। दलाल यह करते हैं कि मरीज के परिजनों को देखकर भांप लेते हैं। उन्हें बताते हैं कि वह ब्लड दिला देंगे, लेकिन इसके एवज में रुपये चाहिए। मरीज के तैयार होने पर पांच से दस हजार रुपये में तय करते हैं। फ्री होने की डिमांड लेकर चिकित्सक के पास पहुंचते हैं। चिकित्सक देखते ही डिमांड कर देते हैं। ब्लड बैंक में दिखाकर ब्लड दिलवा देते हैं। सबकुछ लीगल, लेकिन न जानकारी न होने के कारण मरीजों का आर्थिक शोषण कर लेते हैं।



आशा ने पहुंचाया था निजी अस्पताल

परसा शाह आलम में अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता ने दम तोड़ दिया था। अस्पताल पहुंचाने में एक आशा और स्वास्थ्यकर्मी का नाम सामने आया था। लेकिन अब तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

बोले जिम्मेदार

आशा वर्कर और स्वास्थ्यकर्मी के शामिल होने के मामले की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोई भी मामला सामने आता है तो उसमें जांच होने के साथ ही कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी कार्रवाई होगी।

-डॉ. नरेंद्र वाजपेयी, सीएमओ सिद्धार्थनगर



सील किए 21 अस्पताल, सिर्फ 11 पर केस, वायरल हुआ वीडियो
शोहरतगढ़ में अवैध रूप से संचालित अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद विधायक विनय वर्मा ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ताबड़तोड़ छापा मारा और अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड सेंटरों को सील किया। लेकिन सेटिंग के खेल में 11 अस्पतालों व जांच सेंटरों के खिलाफ ही केस दर्ज कराया गया। जिनके खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ, उन अस्पताल संचालकों को राहत मिल गई। स्वास्थ्य विभाग में तत्कालीन सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल, डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी एवं डॉ. बीएन चतुर्वेदी एवं निजी अस्पताल के संचालक के बीच लेनदेन की बातचीत का वीडियो वायरल हुआ था।
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बोले जिम्मेदार

जिस भी मामले में शिकायत होती है। उसकी जांच कराई जाती है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। पूर्व में जो भी मामले आए हैं, उसमें रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।

-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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