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मंदिर की जमीन पर अंत्येष्टि स्थल निर्माण विरोध

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अंत्येष्टि स्थल के निर्माण का विरोध
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जमीन को लेकर विवाद, पैमाइश कराने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़नी। नगर पंचायत बढ़नी की ओर से चरगहवा नदी पर बनवाए जा रहा अंत्येष्टि स्थल कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। नगर पंचायत जहां इसे ग्राम समाज की जमीन बता रहा हैं वहीं हृदयनगर मंदिर के महंत ने इसके मंदिर की जमीन होने का दावा किया। उनके समर्थन में गांव के लोग उतर आए हैं और अंत्येष्टि स्थल का निर्माण रुकवाने की डीएम से मांग की है।
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बढ़नी और आसपास के दिवंगत लोगों का अंतिम संस्कार चरगहवा नदी पर होता है। शासन की ओर से चरगहवा नदी पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराने के लिए 28 लाख रुपये जारी किए गए हैं। अंत्येष्टि स्थल का निर्माण नगर पंचायत प्रशासन को कराना है। नगर पंचायत ने इसके लिए पहले नदी के पश्चिमी तट पर मड़नी और हृदयनगर गांव की जमीन का चुनाव किया लेकिन मड़नी के प्रधान ने जमीन देने में असमर्थता व्यक्त की। इसके बाद हृदयनगर स्थित मंदिर से सटी जमीन पर अंत्येष्टि स्थल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया। जेसीबी से खुदाई होती देख मंदिर के महंत ने जानकारी ली। अंत्येष्टि स्थल बनाए जाने की बात पर उन्हें जमीन मंदिर की होने का दावा करते हुए विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि यह जमीन सरकारी अभिलेखों में मंदिर के नाम दर्ज है। निर्माण का विरोध महंत सहित गांव के नंदलाल उपाध्याय, सुमेश चौधरी आदि ने किया। इन लोगों ने प्रशासन से मांग की कि निर्माण कार्य रुकवा कर पहले पैमाइश करा मंदिर की जमीन सुरक्षित कराई जाए। इस संबंध में लेखपाल दुर्गेश शर्मा ने बताया कि जमीन मंदिर की है। गांववालों ने डीएम को शिकायती पत्र लिखकर निर्माण कार्य रूकवाने की मांग की है। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी राजन गुप्ता ने बताया कि ग्राम समाज की भूमि मानकर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यदि यह जमीन मंदिर के नाम है तो पैमाइश के बाद ही तथ्यों के आधार पर निर्माण कार्य होगा।
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