राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर मंगलवार को सरकारी दफ्तरों में काम-काज ठप रहा। कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल की। सरकार की नीतियों को कर्मचारी विरोधी ठहराते हुए प्रदर्शन किया। कार्यालयों के बाहर धरना देकर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगा।
दस सूत्रीय मांगों के समर्थन में आंदोलित कर्मचारी सुबह कार्यालय परिसरों में एकत्रित हुए। नारेबाजी करते हुए परिसर में धरने पर बैठ गए। कलेक्ट्रेट, विकास भवन, सीएमओ कार्यालय, पीडब्लूडी, सिंचाई, नलकूप विभागों में हड़ताल का व्यापक असर दिया।
दूर-दराज से आए ग्रामीणों को कर्मचारियों की हड़ताल के चलते वापस लौटना पड़ा। विकास भवन पर आयोजित धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारी परिषद के जिला संयोजक अनिल सिंह ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही है। बार-बार आंदोलन के बावजूद मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा। नए-नए फरमान जारी कर कर्मचारियों का उत्पीडन किया जा रहा है।
इन नीतियों से बाज आते हुए सरकार कर्मचारियों की सभी मांगों को शीघ्र पूरा करे। मंत्री अरुण प्रजापति ने कहा कि मांगों पर सरकार गंभीरता नहीं दिखाती तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में शिवाकांत पांडेय, भूपेश शुक्ला, मनोज पांडेय, विनोद त्रिपाठी, हरीश पांडेय, उदय प्रताप सिंह, ईश्वर चंद शर्मा, इफ्तखार अहमद, अब्दुल्ला खां, नूरुल हुदा, विनय श्रीवास्तव, केएम उपाध्याय, गोविन्द ओझा, वाईपी यादव, वाईके द्विवेदी, शिवपूजन मणि त्रिपाठी, दीपेन्द्र मणि त्रिपाठी, रणवीर सिंह, अनिल पांडेय, सुभाष सिंह, शाहनवाज सिद्दीकी, अनिल कुमार, मीना सिंह, चन्द्रावति देवी, एसएन पांडेय, महेन्द्र कुमार, वीरेन्द्र कुमार, अनुराग यादव, अवधेश, हरिश्चन्द्र, काशीराम, दिनेश, ओमप्रकाश पांडेय, सुरेश, एसएन पांडेय आदि शामिल रहे।