संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। निर्माण कार्यों की जांच में अनियमितता के जिन मामलों में ठेकेदार पर कार्रवाई हो रही है, उनमें विभागीय निगरानी अधिकारी साफ बचे नजर आ रहे हैं। वैसे तो जिले में पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आए, लेकिन ताजा मामला नगर पंचायत कपिलवस्तु में नाली निर्माण से जुड़ा है।
जांच में अनियमितता मिलने पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी नाली ध्वस्त कराते हुए ठेकेदार को दोबारा निर्माण कराने का निर्देश दिया गया। दो माह से हो रहे निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे जेई और ईओ पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
ऐसे में इन जांचों पर सवाल खड़ा होना तय है। मामला यह है कि नगर पंचायत कपिलवस्तु के कृष्णानगर वार्ड के मदारीपुर मोहल्ले में दो माह से नाली निर्माण हो रहा था। इसमें सड़क के एक तरफ कार्य पूरा हो चुका था और दूसरी तरफ के ठेकेदार की तरफ से नाली निर्माण कराया जा रहा है।
सोशल मीडिया के आधार पर डीएम के निर्देश पर जांच करने पहुंचे डीडीओ जीपी कुशवाहा को निर्माण कार्य में अनियमितता मिली। इसके बाद ठेकेदार को नाली ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण कराने का निर्देश दिया गया। यहां लगभग पांच-पांच लाख रुपये से 100- 100 मीटर तक अलग-अलग ठेकेदार से कार्य होना था। इसमें एक तरफ दो सौ मीटर निर्माण हो चुका था और दूसरी तरफ आधा कार्य पूरा हो चुका था।
नाली निर्माण के ध्वस्तीकरण और नए निर्माण कराने के निर्देश से तो ठेकेदार दंडित हो गया, लेकिन संबंधित विभागीय जेई और नगर पंचायत ईओ मामले में बच गए। जबकि कार्य की गुणवत्ता को लेकर इन अधिकारियों की तरफ से ठेकेदार को पूर्व में कोई नोटिस या चेतावनी नहीं दी गई।
ऐसे में अनियमितता के इस मामले की हुई जांच एवं कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मदारीपुर निवासी मुस्तफा, अब्दुल माजिद, करीम, अमरीका आदि का कहना है कि मोहल्ले में नाली निर्माण के समय कोई अधिकारी निगरानी करने आता नहीं दिखा। अनियमितता मामले में ठेकेदार के साथ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।