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Siddharthnagar News: अब नहीं वसूल सकेंगे अधिक राशि, सर्जरी की फीस तय

Mon, 06 Apr 2026 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- सर्जरी (क्रिटिकल व माइनर) के सामानों की तय फीस का बोर्ड वार्ड में लगाया गया
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- जानकारी के अभाव में बिचौलिए करते थे मनमानी वसूली, मरीज व परिजन खुद रेट देखकर कर सकेंगे सवाल-जवाब

- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में हर माह हड्डी विभाग में 200 के करीब होती है सर्जरी

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में अब बिचौलिए मरीजों का शोषण नहीं कर पाएंगे। पारदर्शिता के लिए हड्डी में माइनर और मेजर सर्जरी के लिए तय रेट लिस्ट मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वार्ड में लगा दी गई। ऐसे अब मरीज भ्रमित नहीं होंगे और मरीज माफिया की गिरफ्त में आकर आर्थिक शोषण का शिकार होने से बच सकेंगे।
ऑर्थो वार्ड के बाहर लगी रेट लिस्ट को देखकर अब सामानों के दाम का मरीज के तीमारदारों को पता चल जाएगा। ऐसे में अगर दिक्कत होती है तो बोर्ड लिस्ट को देखकर वे सीधे डॉक्टर से बात कर सकेंगे। क्योंकि, कई बार ऐसा मामला सामने आ चुका है, जिसमें बगैर डॉक्टर की जानकारी के बिचौलिए मरीजों को फंसाकर रुपये ऐंठ लेते हैं, अब उस पर पूरी तरह से विराम लग जाएगा।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज मरीजों माफियाओं की दखल इस कदर थी कि दवा से लेकर जांच और सर्जरी तक में मरीजों को वरगलाकर आर्थिक शोषण किया जाता रहा है। गठजोड़ के जरिये हर कदम पर मरीजों को फंसाया जाता रहा और निजी जांच केंद्र, मेडिकल स्टोर पर या निजी अस्पताल में लेकर मरीजों को शोषण का शिकार बनाते हैं। कई बार बिचौलिया डॉक्टरों के पीठ पीछे अच्छे इलाज की बात करके अस्पताल में ही रुपये ऐंठ लेते थे। जब कोई बात बिगड़ती थी और शिकायत होती थी तो मामला बाहर आता था। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू हुआ। इसमें जहां हर प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर निगरानी बढ़ा दी गई। इसके साथ ही बिचौलियों पर शिकंजा कसने के लिए ड्रेस और आईडी कार्ड लागू किया गया। साथ ही बार-बार दिखने वाले चेहरों पर नजर रखना शुरू हुई तो इसमें काफी हद तक कमी आई। अब सेटिंग का खेल बाहर से ही हो पाता है।
इसी बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हड्डी से जुड़े माइनर और मेजर सर्जरी के शुल्क तय होने के साथ ही उसका रेट लिस्ट चस्पा की गई है। इसमें सर्जरी में लगने वाल एंप्लांट की राशि भी तय है। यह बोर्ड मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में लगाया गया है। इसके पीछे यह उद्देश्य है कि मरीजों को रेट के बारे में जानकारी रहेगी। कोई अधिक मांगता है तो सीधे सवाल जवाब कर सकते हैं। इससे जहां मरीज माफियाओं की पहुंच कमजोर होगी। वहीं, मरीजों का आर्थिक शोषण रुकेगा। आंकड़ों पर गौर करें तो मेडिकल कॉलेज में एक माह में माइनर और मेजर की कुल लगभग 200 के करीब सर्जरी होती है। ऐसे में सटीक जानकारी मिलने से मरीजों को लाभ मिलेगा। यह बिना आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों के लिए व्यवस्था है।
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इस संबंध सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि गैर आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों की सहूलियत के लिए रेट लिस्ट लगाई है। इ0से उन्हें किसी प्रकार परेशानी न हो और कितना किसी सर्जरी में लगता है, उन्हें जानकारी मिल सके।
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