गरीबी और तंगी के कारण थैलीसिमिया से पीड़ित 14 माह के बेटे को समुचित उपचार करा पाने में नाकाम होकर इच्छा मृत्यु मांगने वाले पिता को अब नई उम्मीद की किरण जगी है।
डीएम की पहल के बाद न सिर्फ इच्छा मृत्यु का फैसला टाला है, बल्कि बेटे को भी नया जीवन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। डुमरियागंज तहसील के ग्राम कुड़ी निवासी देवप्रकाश के 14 माह के पुत्र को थैलीसीमिया है।
उसका इलाज पीजीआई में चलता है। उसे स्वस्थ रखने के लिए हर माह डायलिसिस जरूरी है। इसका खर्च काफी अधिक है। मजदूरी कर परिवार के लिए बमुश्किल दो जून की रोटी कमाने वाले पिता के लिए यह खर्च उठा पाना मुश्किल हो गया है। परिवार ने मदद के लिए कई जगह दस्तक दी, मगर राहत नहीं मिली।
पूरी तरह टूट चुके परिवार ने बेटे का दर्द देखा नहीं गया तो उसने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की थी। राष्ट्रपति भवन में पत्र के पहुंचते ही मामले को संज्ञान में लेते हुए शासन से इस संबंध में जानकारी मांगी।
प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार ने डीएम को निर्देशित किया कि रानी लक्ष्मी बाई सम्मान कोष से भी विशेष मामले को देखते हुए एसजीपीआई के खाता में पांच लाख रुपये भेजने की व्यवस्था करें।
जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। डीएम डॉक्टर सुरेंद्र कुमार ने एसडीएम विनय कुमार सिंह को मौके पर भेजा। जिला प्रशासन ने ऐसे असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीजों की खोज शुरू कर दी है। डीएम ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए पीड़ित परिवार को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
सभी तहसीलों को निर्देश दिया गया कि ऐसे परिवारों की खोज करने के बाद उन्हें राहत कोष से सहायता प्रदान किया जाए, जिससे वह मुख्यधारा में वापस आ सके।