सिद्धार्थनगर। गेहूं की फसल की कटाई शुरू होने के साथ ही आग लगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में जिले के अलग- अलग थाना क्षेत्रों में करीब 200 बीघा से अधिक फसल आग की भेंट चढ़ चुकी है। छोटी से लापरवाही में हजारों किसानों की कई हेक्टेयर फसल आग की भेंट चढ़ गई है। इसमें कहीं न कहीं पराली और कटाई के दौरान मशीन से होने वाली लापरवाही बड़ा कारण माना जाता है। अब आग लगाने की पुष्टि होने के बाद न सिर्फ आपदा प्रबंधन अधिनियम का उल्लंघन करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी बल्कि, जुर्माना के साथ ही सरकार की सभी योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाएंगे।
जनपद में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है। फसल की कटाई के साथ तापमान में बेतहाशा वृद्धि होती है। इसके साथ ही आग लगी की घटनाएं बढ़ जाती है। कुछ मामलों में फसल अवशेष जलाने से आग लगती है तो कुछ कंबाइन और भूसा मशीन से आग लगने के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में जुर्माना तो लगाया जाता है, लेकिन इस तरह पराली जलाने या आग लगने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में एक सप्ताह आगलगी की घटनाओं में करीब 200 बीघा से अधिक गेहूं की फसल जल चुकी है।
ऐसे में फसल अवशेष जलाने और खेतों में आग लगाने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन को कड़े कदम उठाए हैं। अब ऐसी किसी भी घटना को हल्के में नहीं लिया जाएगा। आपदा प्रबंधन के प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने वाले किसानों पर सीधे आर्थिक दंड लगाया जाएगा, साथ ही उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज होगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पहली बार गलती करने पर 5 हजार से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा, लेकिन यदि वही किसान दोबारा इस तरह की लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ उसे सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी और प्रमाण के आधार पर ही फैसला लिया जाएगा।
तहसील और ब्लॉक स्तर पर टीमें बनीं
आगलगी की घटनाओं की गिगरानी और जांच के लिए तहसील और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं। यह टीमें खेतों में आग लगने की हर घटना की जांच करेंगी। स्थानीय रिपोर्ट और मौके पर जांच के आधार पर यह तय किया जाएगा कि आग प्राकृतिक कारणों से लगी या जानबूझकर फसल अवशेष जलाए गए। पुष्टि होते ही संबंधित किसान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पराली जाने के मामले में जुर्माना के साथ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दोबारा पकड़ने जाने पर सरकारी योजनाओं से भी वंचित किया जाएगा।
राजेश कुमार, उप कृषि निदेशक
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तेजी से बढ़ रहीं घटनाएं
जिले में हर साल गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं, जिससे न केवल फसलें जलकर नष्ट हो जाती हैं, बल्कि आसपास के गांवों और संपत्तियों पर भी खतरा मंडराने लगता है। आग बुझाने में फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अमले को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी गंभीर असर पड़ता है। ऐसे में प्रशासन की यह सख्ती किसानों को जागरूक करने और नुकसान को कम करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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ये तय किए गए नियम
फसल अवशेष जलाना आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अपराध
पहली बार में 5 हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माना
दोबारा गलती पर मुकदमा दर्ज और सख्त कार्रवाई
फील्ड जांच के आधार पर होगी पुष्टि
जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही अंतिम कार्रवाई
दोषी किसान को सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाएगा।