सिद्धार्थनगर। जिले के अफसर नीली बत्ती का मोह नहीं छोड़ पा रहे। तमाम हिदायतों और सख्त निर्देशों के बावजूद नीली बत्ती लगाकर घूम रहे हैं, वह भी प्राइवेट वाहनों पर। परिवहन विभाग भी इसे नियम विरुद्ध मान रहा है, मगर मामला सरकारी मुलाजिमों से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई से हिचक रहा है।
नियमों पर गौर करें तो नीली बत्ती लगाने का अधिकार पुलिस-प्रशासन के अफसरों के अलावा प्रवर्तन कार्य से जुड़े अफसरों को है। इस श्रेणी के अफसर भी सिर्फ अधिकृत सरकारी वाहन पर ही बत्ती लगा सकते हैं। जिले में यह नियम बेमतलब साबित हो रहे हैं। शिक्षा, पंचायती राज, ग्राम विकास सहित कई विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मनमाने ढंग से निजी गाड़ियों पर नीली बत्ती लगाकर रौब गांठते फिर रहे हैं। नीली बत्ती लगी इनकी गाड़ियां सड़कों पर तो फर्राटे भरती ही हैं, कलेक्ट्रेट और विकास भवन जैसे स्थानों पर भी बेरोकटोक आ-जा रही हैं। जाहिर है, उच्चाधिकारियों की भी इस पर नजर पड़ती होगी, लेकिन पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर कोई नहीं लेना चाहता। सीमावर्ती जिला होने के कारण कई बार ऐसे वाहनों का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में भी होने के मामले सामने आते रहे हैं।
इससे न सिर्फ बत्ती की साख प्रभावित हो रही है, बल्कि शासन-प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही है। बावजूद जिम्मेदार बत्ती का दुरुपयोग रोकने पर गंभीर नहीं हैं। इस संबंध में एआरटीओ आशुतोष शुक्ल का कहना है कि बत्ती लगाने का अधिकार सिर्फ पुलिस-प्रशासन व प्रवर्तन कार्य से जुड़े अफसरों को है। वह भी अधिकृत सरकारी वाहन पर ही बत्ती लगा सकते हैं। इससे इतर कोई नीली बत्ती का इस्तेमाल कर रहा है तो सरासर गलत है। जिलाधिकारी से निर्देश लेकर नीली बत्ती का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।